BILASPUR NEWS. बिलासपुर कांग्रेस भवन में आज जिला कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्षों के पदभार ग्रहण और शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव विशेष रूप से मौजूद रहे। इस अवसर पर जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री और शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने पद की शपथ ली। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान भले ही कोई प्रत्यक्ष विवाद सामने नहीं आया, लेकिन कांग्रेस के अंदर चल रही गुटबाजी और आपसी खींचतान की झलक मंच से लेकर कार्यकर्ताओं के बीच साफ दिखाई दी। पूर्व शहर अध्यक्ष विजय पांडेय ने मंच से बड़ा बयान देते हुए कहा कि, कई लोग पांच साल कांग्रेसी रहते हैं, लेकिन चुनाव आते ही उनकी भाषा बदल जाती है और ऐसे लोग ही पार्टी को चुनाव हराते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों पर अनुशासन का डंडा चलना चाहिए, तभी प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन सकेगी।
वहीं कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने पूर्व जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी पर तंज कसते हुए कहा कि, सिर्फ अखबार में छपने से कोई नेता नहीं बनता। उन्होंने कहा कि, पार्टी में ऊपर बैठे लोग सब देख रहे हैं, इसलिए सभी को जिम्मेदारी से अपना काम करना चाहिए।

आगे जिला कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने मंच से चेतावनी देते हुए कहा, अनुशासन का पालन न करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। कांग्रेस की विचारधारा से जो भी समझौता करेगा, उस पर कार्रवाई होगी। चाहे वह कितना बड़ा ही क्यों न हो, उसे अनुशासन में लाने का काम वे करेंगे।
आगे नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने खुले मंच से गुटबाजी पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि, पार्टी पहले राज्य, फिर जिले और ब्लॉक स्तर पर बंटी और इसी कारण पार्टी कमजोर हुई। उन्होंने कहा कि सिर्फ “जिंदाबाद” के नारे लगाने से काम नहीं चलेगा, यही हार का एक बड़ा कारण है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने नवनियुक्त अध्यक्षों को स्पष्ट संदेश दिया कि, “आधा पार दुकान, आधा पार मकान” अब नहीं चलेगा। जिलाध्यक्षों को फुल टाइम संगठन के लिए काम करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह का मतभेद हो तो उसे बंद कमरे में सुलझाया जाए, मीडिया और माइक के सामने नहीं। कांग्रेस के कुल मिलाकर, संगठन को मजबूत करने और एकजुट रहने के संदेशों के बीच कांग्रेस नेताओं ने मंच से ही आंतरिक कलह और गुटबाजी की मौजूदगी को स्वीकार किया।



































