BHILAI NEWS. आखिरकर नगर निगम भिलाई ने 20 करोड़ की बसों को कोड़ियों के दाम पर बेचने की तैयारी कर ली है। पांच सालों से कबाड़ बन चुकी 69 सिटी बसों की कल नीलामी की प्रक्रिया होगी। 9 जनवरी को दोपहर 12 बजे इन बसों की ऑनलाइन नीलामी शुरू होगी। इसमें पहले से कबाड़ की गाड़ी खऱीदने वाले रजिस्टर्ड बिडर ही भाग ले सकेंगे।

इस नीलामी के साथ ही इन बसों को कबाड़ बनाने वाले लोगों पर कार्रवाई करने न तो कोई सबूत बचेंगे और न ही आगे कोई जांच की गुंजाइश बचेगी। इस नीलामी के साथ-साथ ही निगम की संचित निधि से लगाए गए 10 करोड़ भी डूब जाएंगे। बता दें कि 20 करोड़ की लागत से 70 सिटी बस खरीदकर राज्य शासन ने दुर्ग भिलाई के लिए सिटी बस शुरू की थी। जिसमें 10 करोड़ रुपए भिलाई निगम ने संचित निधि से दिए थे। वहीं कोरोना काल में बसों के पहिए थम गए और मात्र कुछ महीने ही चली नई बसें खड़े-खड़े कबाड़ हो गई।
निगम के अधिकारियों और संचालन एजेंसी की मिली भगत से खड़ी बसों के टायर, गेयर बॉक्स, चेयर, इंजन, खिड़की, दरवाजे सब कुछ चोरी हो गया। इसके बाद एक एजेंसी ने दोबारा बसों के संचालन का टेंडर तो लिया, लेकिन चंद दिनों में उसने भी हाथ खड़े कर दिए। लेकिन जब इन दोनों एजेंसी ने काम वापस किया तब निगम के अधिकारियों ने जेहमत भी नहीं उठाई कि हैंडओवर लेने से पहले बसों की स्थिति को देख लेते।

यहां चोरी औऱ् भ्रष्टाचार का आलम यह था कि 13 नई बसें डीपो के बाहर भी नहीं निकली थी औऱ् खड़े-खड़े केवल उनका ढांचा ही बच गया। जब-जब मामला खबरों में आया तब-तब अधिकारी एफआईआर और जांच की बात कह केवल टालते रहे, नाममात्र का शिकायत पत्र ही थाने पहुंचा लेकिन एफआईआर नहीं हो सकी। अब जब कल नीलामी है तो बस के पुर्जे-पुर्जे बेचकर खाने वाले लोग और भी निश्चिंत हो जाएँगे, क्योंकि न तो अब बसों का कबाड़ नजर आएगा और न ही कोई सवाल उठाएगा।
इधर इन 10 सालों में धीरे-धीरे बसों के पार्ट्स चोरी होने को लेकर निगम के अधिकारियों का जवाब आज भी गोलमोल है। एक ओर कमिश्नर का कहना है कि उनके आने के बाद ही पुलिस को शिकायत की गई और बस संचालित करने वाली ठेका एजेंसी से काम वापस लिया गया। साथ ही उनकी अमानत राशि भी राजसात की गई।

आयुक्त का कहना है कि वैल्वेशन कमेटी की जांच के बाद पाया गया कि यह बसें चलने लायक नहीं है, इसलिए अब इसकी नीलामी की जा रही है। लेकिन सवाल अब भी यही खड़ा है कि एक ओर निगम का खजाना खाली है और वहीं दूसरी ओर जनता के टैक्स से बनी संचित निधि की 10 करोड़ की रकम भी पूरी तरह इन बसों की तरह डूब गई।




































