मोहित जाटवर
MUNGLI/LORMI NEWS. मुंगेली जिले के लोरमी तहसील अंतर्गत छपरवा संकुल के तिलईडबरा गांव स्थित प्राथमिक शाला में पढ़ाई के दौरान छत की एक मोटी परत (छज्जा) गिरने से हड़कंप मच गया। इस हादसे में कुछ बच्चों को चोटें आईं, हालांकि राहत की बात यह रही कि कोई भी बच्चा गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ। प्राथमिक उपचार के बाद सभी बच्चों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि जिन बच्चों पर छज्जा गिरा, वे आदिवासी समाज से संबंधित हैं। यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है कि आखिर छज्जे में आई दरार पर पहले किसी की नजर क्यों नहीं गई और स्कूल आने वाले शिक्षकों ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया।

जानकारी के अनुसार, स्कूल भवन की छत में दरार पहले से दिखाई दे रही थी। कुछ दिन पहले प्रधानपाठक द्वारा उसे डंडे से गिराने की कोशिश भी की गई थी, लेकिन छज्जा नहीं गिरा तो उसे सुरक्षित मानते हुए उसी स्थिति में छोड़ दिया गया। बाद में वही कमजोर परत अचानक गिर गई और वहां बैठे बच्चे उसकी चपेट में आ गए। गनीमत रही कि बड़ा हादसा टल गया। इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि यह गंभीर लापरवाही है और इसके लिए स्कूल के प्रधानपाठक जिम्मेदार हैं। विभाग द्वारा स्कूल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। हालांकि, जवाब मिलने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर बच्चे
स्कूल भवन की जर्जर स्थिति के बीच बच्चों का पढ़ाई करना चिंता का विषय है। यदि भवन असुरक्षित है, तो वहां कक्षाएं संचालित करना बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। हर वर्ष मरम्मत के लिए राशि खर्च होने के बावजूद इस तरह की घटनाएं होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। ऐसे हालात में अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने से हिचक सकते हैं।

स्कूल प्रबंधन की लापरवाही पर उठे सवाल
यह घटना स्कूल प्रबंधन की बड़ी चूक को उजागर करती है। जब छज्जे में दरार पहले से दिखाई दे रही थी, तब उस स्थिति में कक्षाएं संचालित नहीं की जानी चाहिए थीं। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। यदि इस हादसे में किसी बच्चे को गंभीर नुकसान होता, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता।

जर्जर भवन में कक्षाएं संचालित न करने के हैं निर्देश
शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि जर्जर स्कूल भवनों में मरम्मत के बाद ही कक्षाएं संचालित की जाएं। इसके लिए गाइडलाइन भी जारी की गई है। इसके बावजूद शाला प्रबंधन द्वारा नियमों की अनदेखी कर गंभीर लापरवाही बरती गई।

बीईओ का बयान: नियमानुसार होगी कार्रवाई
इस मामले में संबंधित बीईओ मनीषा पाटले ने बताया कि घटना के लिए वहां के शिक्षक जिम्मेदार हैं। उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था और उनका जवाब प्राप्त हो चुका है। विभाग के अनुसार, नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।


































