NEW DELHI NEWS. ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के 27वें दिन वैश्विक सप्लाई चेन को आंशिक राहत मिली है। ईरान ने भारत समेत अपने मित्र देशों के जहाजों को रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के 27वें दिन एक अहम मोड़ सामने आया है। तनाव के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद रखने की नीति में आंशिक ढील दी है।

इस फैसले से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहा तत्काल दबाव कुछ कम होने के संकेत मिले हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने घोषणा की कि भारत समेत कुछ मित्र देशों के जहाजों को इस समुद्री मार्ग से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल उन देशों के लिए है, जो मौजूदा संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं या ईरान के साथ सहयोगात्मक संबंध रखते हैं।

इस फैसले के तहत भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी गई है। मुंबई स्थित ईरानी महावाणिज्य दूतावास ने भी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब संयुक्त राष्ट्र की ओर से लगातार युद्धविराम और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने की अपील की जा रही थी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेताया था कि होर्मुज के बंद रहने से तेल, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है, जिसका असर वैश्विक स्तर पर खेती और आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

ईरान के अनुसार, कई देशों के शिपिंग ऑपरेटर्स ने सीधे संपर्क कर सुरक्षित मार्ग की मांग की थी। इसी आधार पर चयनित देशों को यह राहत दी गई। अराघची ने यह भी बताया कि भारत के दो जहाज हाल ही में इस मार्ग से सुरक्षित गुजर चुके हैं और आगे भी यह व्यवस्था जारी रह सकती है। हालांकि, ईरान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं होगी।

ईरान ने पूरे क्षेत्र को युद्ध क्षेत्र मानते हुए दुश्मन देशों के लिए किसी भी तरह की रियायत से इनकार किया है। भारत के लिहाज से यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है। ऐसे में होर्मुज के आंशिक रूप से खुलने से तेल, गैस और उर्वरकों की सप्लाई पर तत्काल संकट टल सकता है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव कम होने की संभावना है।

इस बीच, अमेरिका की ओर से कूटनीतिक पहल भी जारी है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर प्रस्तावित हमलों को फिलहाल टालते हुए 15 सूत्रीय शांति योजना भेजी है। हालांकि ईरान ने अभी तक इस पर नरम रुख नहीं दिखाया है और पाकिस्तान की मध्यस्थता को भी खारिज कर दिया है। भारत ने भी इस पूरे घटनाक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी नेतृत्व से बातचीत कर होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया था। दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है, ऐसे में इसका आंशिक रूप से खुलना वैश्विक बाजार के लिए राहत का संकेत जरूर है। हालांकि, क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव को देखते हुए स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती।



































