BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ एक परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि रेलवे सिस्टम की कार्यशैली और संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोचिंग डिपो के पास ट्रेन से गिरकर एक रेलवे कर्मचारी की मौत हो गई, लेकिन घटना के कई घंटों बाद तक जिम्मेदार अधिकारियों का मौके पर न पहुंचना कर्मचारियों में आक्रोश का कारण बना।

मृतक की पहचान 40 वर्षीय हरीश शुक्ला के रूप में हुई है, जो सफाई अटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे। जानकारी के मुताबिक, वह छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से अमृतसर से बिलासपुर लौट रहे थे। बुधवार रात करीब 11 बजे, ट्रेन के दरवाजे के पास खड़े रहने के दौरान संतुलन बिगड़ने से वह नीचे गिर गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लंबे समय तक कोई वरिष्ठ रेलवे अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। कर्मचारियों का आरोप है कि दोपहर 2 बजे तक भी प्रशासन की ओर से कोई जिम्मेदार व्यक्ति घटनास्थल पर नहीं आया। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी और असंतोष देखने को मिला।

मौके पर मौजूद ठेकेदार सतीश सिंह ने बताया कि हरीश शुक्ला ड्यूटी से लौट रहे थे और संभवतः दरवाजे के पास खड़े होने के दौरान असंतुलित होकर गिर गए। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों का बीमा कराया गया है और परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा।

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि रेलवे कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों की हकीकत को उजागर करता है। बिलासपुर रेलवे जोन, जो देश के सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले जोनों में गिना जाता है, वहां इस तरह की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं।

अब सवाल सिर्फ मुआवजे का नहीं, बल्कि जवाबदेही और सुधार का है—क्या इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन अपनी जिम्मेदारी तय करेगा, या फिर एक और हादसा फाइलों में दबकर रह जाएगा?


































