RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में प्रदेश के कुछ इलाकों में अवैध अफीम की खेती के मामले सामने आने के बाद सरकार बेहद सख्त नजर आ रही है। मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों को अल्टीमेटम देते हुए अपने-अपने क्षेत्रों का व्यापक सर्वे करने और 15 दिनों के भीतर ‘क्लीन चिट’ सर्टिफिकेट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, पिछले कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ के वनांचल और सीमावर्ती इलाकों (जैसे बलरामपुर और कवर्धा के कुछ क्षेत्र) से अफीम की अवैध खेती की खबरें आई थीं। पुलिस और प्रशासन ने छापेमारी कर लाखों रुपये की अफीम की फसल नष्ट की थी। इन मामलों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी थी, क्योंकि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों का फायदा उठाकर तस्कर स्थानीय लोगों के माध्यम से यह काला कारोबार फैला रहे थे। इसी को जड़ से खत्म करने के लिए अब राज्यव्यापी जांच के आदेश दिए गए हैं।

सरकार ने ऐसा क्यों किया?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस कदम के पीछे ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) की नीति को आधार बताया है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
नशा मुक्त छत्तीसगढ़: सरकार का लक्ष्य युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना और राज्य में ड्रग सिंडिकेट की कमर तोड़ना है।
अपराध पर लगाम: अवैध खेती से होने वाली कमाई अक्सर असामाजिक तत्वों और अन्य अपराधों को बढ़ावा देती है, जिसे रोकना सरकार की प्राथमिकता है।

जवाबदेही तय करना: 15 दिनों के भीतर कलेक्टरों से प्रमाण पत्र मांगकर सरकार ने सीधे तौर पर जिला प्रशासन की जिम्मेदारी तय कर दी है। यदि भविष्य में किसी जिले में अफीम मिली, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही होगी।

सरकार का सख्त कार्रवाई का संदेश
दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई के निर्देश देकर सरकार ने साफ कर दिया है कि राज्य में अवैध मादक पदार्थों के कारोबारियों के लिए कोई जगह नहीं है। आयुक्त भू-अभिलेख ने भी सभी कलेक्टरों को पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि वे अपने क्षेत्र की सघन जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि उनके जिले में कहीं भी अफीम की खेती नहीं हो रही है।



































