BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित आबकारी और DMF घोटाला मामले में हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर को जमानत दे दी है। इसके साथ ही यश पुरोहित और नितेश पुरोहित को भी न्यायालय से राहत मिली है। यह आदेश जस्टिस अरविंद वर्मा की एकलपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने पूर्व में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब जारी कर दिया गया है।

3200 करोड़ के शराब घोटाले का मामला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 3200 करोड़ रुपए से अधिक के कथित घोटाले का खुलासा किया था। जांच के आधार पर एसीबी में एफआईआर दर्ज की गई। मामले में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों समेत कई लोगों को नामजद किया गया है।

ईडी की जांच में दावा किया गया कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के माध्यम से घोटाले को अंजाम दिया गया। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि इस नेटवर्क का नेतृत्व चैतन्य बघेल कर रहे थे और लगभग 1000 करोड़ रुपए की राशि उनके जरिए संचालित की गई।

क्या है DMF घोटाला?
डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) से जुड़े कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट के आधार पर ईओडब्ल्यू ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी और 420 के तहत मामला दर्ज किया है।
जांच में सामने आया कि कोरबा जिले के डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड से टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में कुछ ठेकेदारों को अवैध लाभ पहुंचाया गया और उनके बैंक खातों में जमा राशि का बड़ा हिस्सा नकद निकाला गया।

ईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कथित रूप से घूस लेने के लिए खर्च से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए। जांच एजेंसी के अनुसार कमीशन के तौर पर कलेक्टर को 40 प्रतिशत, सीईओ को 5 प्रतिशत, एसडीओ को 3 प्रतिशत और सब-इंजीनियर को 2 प्रतिशत तक हिस्सा मिलने के आरोप हैं।

कोरबा में करीब 575 करोड़ रुपए से अधिक के DMF फंड के उपयोग में अनियमितताओं की बात सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों ने ठेकेदारों, सरकारी अधिकारियों और उनके सहयोगियों के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी भी की थी।


































