BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षकों की निजता और व्यक्तिगत संसाधनों के उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप इंस्टॉल करने के लिए किसी भी शिक्षक को बाध्य नहीं किया जा सकता। साथ ही, जस्टिस एन.के. चंद्रवंशी की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता शिक्षक के खिलाफ इस ऐप को लेकर किसी भी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।

शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें VSK ऐप का उपयोग अनिवार्य किया गया था। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सरकार किसी भी थर्ड पार्टी ऐप के जरिए शिक्षकों की व्यक्तिगत गतिविधियों की निगरानी नहीं कर सकती। शासकीय कार्यों के लिए शिक्षकों को उनके व्यक्तिगत मोबाइल फोन का उपयोग करने के लिए कानूनी रूप से मजबूर नहीं किया जा सकता। ऐप में मौजूद 50 मीटर की जियो-फेंसिंग तकनीक को लेकर भी आपत्ति जताई गई थी।

कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। वर्तमान में यह राहत केवल याचिकाकर्ता शिक्षक को मिली है, लेकिन इस फैसले ने प्रदेश भर के लाखों शिक्षकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।

जानिए क्या है VSK ऐप?
विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) केंद्र सरकार की ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ के तहत विकसित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। एआई (AI) और बिग डेटा के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता की रीयल-टाइम निगरानी करना। इसके जरिए देश के 15 लाख स्कूलों, 96 लाख शिक्षकों और 26 करोड़ छात्रों के डेटा का विश्लेषण करने का लक्ष्य है। ऐप के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए 50 मीटर की जियो-फेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिसे शिक्षक अपनी निजता में हस्तक्षेप मान रहे हैं।



































