NEW DELHI NEWS.केंद्र सरकार ने एक्सप्रेस-वे पर सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। जिन एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं का निर्माण अभी पहले सिरे से आखिरी सिरे तक पूरा नहीं हुआ है, वहां टोल शुल्क में 25% की छूट दी जाएगी। यह व्यवस्था 15 फरवरी से लागू होकर एक साल तक प्रभावी रहेगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक टोल दरों से जुड़े नियमों में संशोधन कर यह फैसला लागू किया गया है।

दरअसल, पहले अधूरे एक्सप्रेस-वे पर भी पूरी तरह बने एक्सप्रेस-वे के बराबर टोल वसूला जा रहा था, जिससे यात्रियों को असुविधा और अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता था। अब नए प्रावधानों के तहत ऐसे एक्सप्रेस-वे पर टोल दरें राष्ट्रीय राजमार्गों के बराबर कर दी जाएंगी। आमतौर पर एक्सप्रेस-वे पर टोल शुल्क राष्ट्रीय राजमार्गों की तुलना में करीब 25% अधिक होता है, क्योंकि यहां तेज़ रफ्तार, सीमित एंट्री-एग्जिट और बेहतर सुविधाएं मिलती हैं।

दरअसल, जिन परियोजनाओं में अभी निर्माण कार्य जारी है या जो खंडों में चालू हैं, वहां यात्रियों को पूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं। इसी को देखते हुए मंत्रालय ने टोल में अस्थायी छूट का निर्णय लिया है। देश में इस समय करीब 18 एक्सप्रेस-वे निर्माणाधीन हैं। इनमें दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हैं, जिनके कुछ खंडों पर यातायात शुरू हो चुका है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन अधूरे हिस्सों पर निजी और सार्वजनिक, दोनों तरह के सभी वाहनों को कम टोल देना होगा।

यात्रियों को ये होगा फायदा?
लंबी दूरी के यात्रियों का सफर सस्ता होगा।
निर्माणाधीन मार्गों पर टोल और मिलने वाली सुविधाओं के बीच संतुलन बनेगा।
रोजाना एक्सप्रेस-वे का उपयोग करने वाले वाहन चालकों के खर्च में सीधी बचत होगी।

मंत्रालय का कहना है कि जैसे-जैसे एक्सप्रेस-वे परियोजनाएं पूरी होंगी, वैसे-वैसे टोल दरों की समीक्षा की जाएगी और पूर्ण सुविधा उपलब्ध होने पर मानक दरें लागू की जाएंगी। इससे यात्रियों को बेहतर सेवा और उचित शुल्क—दोनों का संतुलित लाभ मिलेगा।

































