BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में आवारा पशुओं से हो रहे सड़क हादसों और फसलों के नुकसान को लेकर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में बड़ा दावा किया है। शासन ने शपथपत्र के जरिए कोर्ट को बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 46 अस्थायी मवेशी शेल्टर होम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 4,160 आवारा मवेशियों को सुरक्षित रखा गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की दिशा में उठाया गया कदम है और इसके लिए ‘गौधाम योजना’ पर तेजी से काम किया जा रहा है।

36 गौधामों को मिली मंजूरी, हर गौधाम में 200 मवेशियों की व्यवस्था
राज्य सरकार के अनुसार, 36 नए गौधामों की स्थापना को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। प्रत्येक गौधाम में 200 मवेशियों को रखने की क्षमता होगी। फिलहाल 3 गौधाम संचालित हो चुके हैं। 8 गौधामों में निर्माण एवं मरम्मत कार्य जारी है। इन गौधामों का संचालन स्वयंसेवी संस्थाओं, गौशाला समितियों और किसानों के समूहों के माध्यम से किया जाएगा।
निगरानी कड़ी, नोडल अधिकारी नियुक्त
हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद शासन ने निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की है। छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के रजिस्ट्रार को आवारा पशुओं की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
पशु चिकित्सकों को शेल्टर होम्स का नियमित निरीक्षण कर स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और चारा-पानी की मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्राम पंचायत स्तर पर भी व्यवस्था, फसलों को राहत
पशुधन विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने कोर्ट को बताया कि ग्राम पंचायत स्तर पर भी अस्थायी शेल्टर होम बनाए गए हैं, जिससे फसलों को नुकसान से बचाया जा सके। फसल कटाई के बाद मवेशियों को उनके मालिकों को सौंप दिया जाता है। बेल्तरा और सुकुलकारी ग्राम पंचायतों में यह मॉडल सफल रहा है। सड़क सुरक्षा को लेकर गृह विभाग और NHAI के साथ समन्वय कर विशेष कदम उठाए जा रहे हैं।
23 मार्च को अगली सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने शासन के जवाब के बाद इस जनहित याचिका पर 23 मार्च को अगली सुनवाई की तिथि तय की है।




































