BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाई कोर्ट ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) में कार्यरत दर्जनों कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि चयन समिति द्वारा की गई तकनीकी खामियों का खामियाजा उन निर्दोष कर्मचारियों को नहीं भुगतना पड़ेगा, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

रेलवे बोर्ड ने वर्ष 2012 में सीनियर पाथवे सुपरवाइजर के 17 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था, जिसके बाद 2013 में चयन प्रक्रिया पूरी कर नियुक्तियां दी गईं। हालांकि, चयन के मानदंडों और अतिरिक्त अंकों को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जो पहले केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण पहुंचा। कैट के आदेश के बाद 2016 में जब रेलवे ने संशोधित चयन सूची जारी की, तो 2013 से काम कर रहे एक दर्जन से ज्यादा कर्मचारियों के नाम बाहर कर दिए गए।

कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
नौकरी से बाहर किए जाने के खतरे को देखते हुए प्रभावित कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता कर्मचारी 13 वर्षों से निष्ठापूर्वक कार्य कर रहे हैं और इतने लंबे समय के बाद उन्हें हटाना न केवल अन्यायपूर्ण होगा, बल्कि उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट भी खड़ा कर देगा।

अदालत का निर्देश
अदालत ने रेलवे प्रशासन को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं सभी याचिकाकर्ता कर्मचारियों को संशोधित मेरिट लिस्ट में तत्काल शामिल किया जाए। पुराने और नए उम्मीदवारों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए याचिकाकर्ताओं को वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे स्थान दिया जाए। इस फैसले से उन कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है जिनकी नौकरी पर चयन समिति की तकनीकी गड़बड़ी के कारण तलवार लटक रही थी।




































