BILASPUR NEWS. प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स में इलाज के साथ-साथ मरीजों और उनके परिजनों को अव्यवस्थाओं से भी जूझना पड़ रहा है। गायनिक वार्ड में मरीज को डिस्चार्ज कराने पहुंचे परिजन उस वक्त असहज स्थिति में आ गए, जब घंटों इंतजार के बावजूद उन्हें न तो स्पष्ट जानकारी मिली और न ही कोई जिम्मेदार जवाब।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डिस्चार्ज को लेकर डॉक्टरों और स्टाफ के बीच आपसी समन्वय की कमी साफ नजर आई। फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल घूमती रहीं, लेकिन मरीज और परिजन यह नहीं समझ पाए कि प्रक्रिया कहां अटकी हुई है। इसी असमंजस ने धीरे-धीरे तनाव को जन्म दिया।
बताया जा रहा है कि इसी दौरान परिजनों की नाराजगी बढ़ती चली गई और बहस की स्थिति बन गई। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद माहौल बिगड़ा, लेकिन सवाल यह है कि यदि शुरुआत में ही पारदर्शी व्यवस्था और संवाद होता, तो स्थिति यहां तक क्यों पहुंचती?

घटना के दौरान अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावी नजर नहीं आई। वार्ड में मौजूद सुरक्षा कर्मी हालात को नियंत्रित करने में नाकाम रहे, जिससे अन्य मरीज और उनके परिजन भी भयभीत हो गए।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सिम्स हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों में आम होती जा रही अव्यवस्था की तस्वीर है।

फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने जांच की बात कही है, लेकिन मरीजों और उनके परिजनों की अपेक्षा है कि केवल जांच नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्थाएं बनाई जाएं, जिससे इलाज के दौरान उन्हें अनावश्यक मानसिक तनाव का सामना न करना पड़े।


































