DURG NEWS. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल मंगलवार को 24वें दिन भी जारी रही। इसी कड़ी में प्रदेश के सभी 33 जिलों में सवाल रैली का आयोजन किया गया। दुर्ग में करीब 800 से ज्यादा कर्मचारी भाजपा कार्यालय पहुंचे और अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर जिलाध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक को ज्ञापन सौंपने पहुंचे। उनकी अनुपस्थिति में प्रतिनिधि ने ज्ञापन लिया। इस दौरान कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी करते हुए सरकार से पूछा— “आपने बनाया है तो संवारेंगे कब?”
रैली में उठे सवाल
मोदी की गारंटी में जब घोषणा की थी तो वादा निभाएंगे कब?
मातृ राज्य मध्यप्रदेश जैसी सुविधाएं यहां कब मिलेंगी?
20 साल से काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित कब करेंगे?
अनुकंपा नियुक्ति से वंचित परिवारों की सुध कब लोगे?
24 दिन में हुए अनोखे प्रदर्शन
पिछले 24 दिनों में कर्मचारियों ने मांगों के समर्थन में कई अलग-अलग तरीके अपनाए। कभी नुक्कड़ नाटक और पुतला दहन, तो कभी संविदा कुप्रथा की शव यात्रा और सद्बुद्धि यज्ञ आयोजित किया। गणेश पूजा पर सद्बुद्धि यज्ञ, तीज पर मेहंदी प्रदर्शन, नेताओं के मुखौटे पहनकर रैली, यहां तक कि केश दान और मनोकामना चुनरी पदयात्रा जैसी गतिविधियां की गईं।
प्रदेशभर में 25 कर्मचारी नेताओं की बर्खास्तगी के विरोध में 16 हजार कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा भी दिया। स्वास्थ्य भवन का घेराव कर चेतावनी पत्र भी फाड़ा गया।
कर्मचारियों का आरोप
एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित मिरी ने कहा कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भाजपा ने घोषणा पत्र में संविदा कर्मियों की समस्याओं का समाधान करने का वादा किया था। 20 माह बीत जाने और 170 से ज्यादा ज्ञापन सौंपने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा— “शासन की लापरवाही और सुस्ती ने ही हमें आंदोलन पर जाने को मजबूर किया है। अब प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर पहुंच चुकी हैं।”
दुर्ग जिला अध्यक्ष का बयान
दुर्ग जिला अध्यक्ष डॉ. आलोक शर्मा ने बताया कि 24 दिन से चल रहा यह आंदोलन अब जनआंदोलन का रूप ले चुका है। “सरकार को तुरंत फैसला लेना होगा, वरना हालात और बिगड़ेंगे।”
10 सूत्री मांगें
1. संविलियन व जॉब सुरक्षा
2. पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
3. ग्रेड पे निर्धारण
4. कार्यमूल्यांकन पद्धति में सुधार
5. लंबित 27% वेतन वृद्धि
6. नियमित भर्ती में सीट आरक्षण
7. अनुकंपा नियुक्ति
8. मेडिकल/अन्य अवकाश सुविधा
9. स्थानांतरण नीति
10. न्यूनतम 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
हड़ताल के चलते पोषण पुनर्वास केंद्र, स्कूलों और आंगनबाड़ी में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण, टीबी-मलेरिया जांच, प्रसव कार्य, टीकाकरण और नवजात शिशु देखभाल केंद्र जैसी मूलभूत स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
संघ की चेतावनी
कर्मचारी संघ का कहना है कि यदि जल्द ही सरकार समाधान नहीं निकालती है तो आंदोलन और तेज होगा। साथ ही प्रदेश की जनता को हो रही परेशानी की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।




































