BILASPUR NEWS. छत्तसीगढ़ हाईकोर्ट में एक तहसीलदार की मनमानी के चलते याचिकाकर्ता की अपील पर अवकाश के दिन कोर्ट लगाकर सुनवाई की गई। मामले की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के बेंच में हुई। कोर्ट ने तहसीलदार के फैसले को मनमानी बताते हुए तलब कर सोमवार को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है।

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बता दें, कोरबा जिला के बरपाली तहसील क्षेत्र के ग्राम कनकी निवासी नूतन रजवाड़े के व्हाट्सएप में 20 सितंबर की शाम 6 बजे के बाद तहसीलदार बरपाली द्वारा सरकारी जमीन से बेदाल करने नोटिस भेजा गया। नोटिस में उन्हें खुद से कब्जा हटाने कुछ घंटों का ही समय दिया गया। इसके खिलाफ नूतन राजवाड़े ने अधिवक्ता रजनीश सिंह बघेल व चेतना शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में शनिवार की सुबह याचिका पेश कर तुरंत सुनवाई का अनुरोध किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अवकाश के दिन जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू की विशेष कोर्ट लगाई गइई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता के कब्जे वाली जमीन बेशक सरकारी है लेकिन याचिकाकर्ता को उसके स्वामित्व की जमीन के बदले में इसे दिया गया था।

तहसीलदार ने छत्तीसगढ़ भूमि राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत कार्यवाही में याचिकाकर्ता के खिलाफ 5 अगस्त 2024 को एक आदेश पारित किया है। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने अनुविभागीीय अधिकारी के समक्ष अपील दायर की है। इससे पहले भी जब याचिकाकर्ता को बिल्कुल समय ही नहीं दिया गया था। सरकारी वकील ने दलील दी कि उन्हें कुछ मिनट पहले ही रिट याचिकाा की अग्रिम प्रति दी गई है।

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यह भी कहा कि मोबाइल फोन पर प्राप्त निर्देश के अनुसार याचिकाकर्ता का अतिक्रमण हटा दिया गया है। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि तथ्यों और परिस्थितयों को देखने पर यह मनमानी लग रहा है। अगली सुनवाई की तारीख तक याचिकाकर्ता की भूमि पर कब्जे के संबंध में यथास्थिति बनाए राने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने बरपाली तहसीलदार को सोमवार को हाई कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है।




































