BILASPUR. समितियों में डंप पड़े धान और सूखत की आशंका को लेकर परेशान सहकारी समितियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर धान का उठाव शीघ्र करने की गुहार लगाई है। याचिकाकर्ता समितियों का कहना है कि राज्य विपणन संघ के अधिकारी राज्य शासन के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे है। इसका खामियाजा उनको भुगतना पड़े़गा। सूखत आने की स्थिति में रिकवरी की जाएगी और राशि की वसूली के लिए शासन स्तर पर कार्रवाई भी संभव है। हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर समितियों से धान का उठाव करने का निर्देश दिया है।

बता दें, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति धनगांव जिला सारंगढ़ सहित प्रदेश के अलग-अलग जिलों से तीन दर्जन से अधिक समितियों ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के बाद समितियों से धान का उठज्ञव न किए जाने की शिकायत करते हुए शीघ्र उठाव की गुहार लगाई है।

सभी याचिकाओं की प्रकृति एक ही तरह के होने के कारण हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा कि राज्य शासन द्वारा संबंधित धान उपार्जन केन्द्रों पर किसानों से सीधे धान खरीदी करने का निर्णय लिया गया था। अक्टूबर-नवंबर 2023 के महीनों में राज्य विपणन संघ जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक लिमिटेड और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के बीच त्रिपक्षी समझौता किया गया।

धान खरीदी केन्द्रों में अनुबंध के नियम एवं शर्तों का पालन करते हुए राज्य विपणन संघ को 72 घंटे की बाहरी सीमा के भीतर या 28 फरवरी 2024 तक बफर स्टाक उठाना था। धान खरीदी की अंतिम तिथि चार फरवरी 2024 थी।

भंडारण कृषिण सहकारी समितियों द्वारा किया जाना था। याचिकाकर्ताओं की शिकायत है कि संबंधित धान उपार्जन केन्द्रों द्वारा बफर स्टाक तो खरीद लिया गया, लेकिन राज्य विपणन संघ ने राज्य शासन द्वारा तय समयावधि में धान का उठाव नहीं किया गया। धान न उठाने से धान की मात्रा में कमी हो सकती है और याचिकाकर्ताओं को आशंका है कि राज्य शासन के अधिकारी उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकते है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संबंधित अधिकारियों को विभिन्न अभ्यावेदन दिए गए लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया।

राज्य शासन का जवाब
राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारियों ने कहा कि धान उठाव के संबंध में प्रबंध निदेशकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। राज्य विपणन संघ और जिला कलेक्टरों को धान उपार्जन केन्द्रों से धान का उठाव यथाशीघ्र करने कहा है। केन्द्र सरकार द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार एक फीसद तक धान की नमी स्वीकार्य है।

उनका यह भी कहना है कि राज्य सरकार हर साल इस संबंध में परिपत्र जारी करती है और पिछले वर्ष राज्य सरकार द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार अनुमेय कमी तीन प्रतिशत थी उन्होंने यह भी कहा कि इस वर्ष इस संबंध में कोई विशेष परिपत्र प्रकाशिन नहीं किया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव और सभी प्रबंध निदेशकों द्वारा 15 मार्च को निर्देश जारी किए गए है।
धान उपार्जन केन्द्रों से धान का उठाव राज्य विपणन संघ एवं कलेक्टरों द्वारा किया जाएगा तथा इस संबंध में एक चार्ट तैयार किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि धान उपार्जन केन्द्रों से धान के उठाव हेतु उचित कार्यवाही की जाएगी। सूखे की कमी के संबंध में राज्य सरकार उचित निर्णय लेगी।




































