
November 29, 2022
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पं. रविशंकर शुक्ल विवि के कला भवन में दो दिवसीय ‘मुक्तिबोध प्रसंग’ का आयोजन
by Vikas Mishra
RAIPUR. पं. रविशंकर शुक्ल विशवविद्यालय के कला भवन में दो दिवसीय ‘मुक्तिबोध प्रसंग’ का आयोजन किया गया। इस आयोजन को साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साथ मिलकर आयोजित कर रही है। इस आयोजन का आज पहला दिन था। इस दौरान कवि व विचारक लाल्टू, वरिष्ठ आलोचक जय प्रकाश, सत्र की अध्यक्षता निभा... Read More





‘मुक्तिबोध प्रसंग’ के उद्घाटन सत्र के दौरान कवि व विचारक लाल्टू ने कहा कि अंधेरे समय में खुद की तलाश करने के नाम मुक्तिबोध है। जैसा अंधेरा मुक्तिबोध के जमाने में था, आज उससे कहीं ज्यादा गहरा है। ऐसे में मुक्तिबोध रोशनी दिखाते हैं। उन्होंने मुक्तिबोध के भाषा संबन्धी विचारों को व्यक्त करते हुए मुक्तिबोध के लेख ‘अंग्रेजी जूते में हिंदी फिट करने वाले भाषाई रहनुमा’ को पढ़ते हुए वर्तमान भाषाई संकट पर बात रखी।
मुक्तिबोध की कविताओं पर केन्द्रित ‘आवेग-त्वरित-काल-यात्री’ विमर्श सत्र के दौरान कवि मिथलेश शरण चौबे ने कहा कि मुक्तिबोध साहित्य और समाज को लेकर चलते हैं। मुक्तिबोध साहित्य व समाज के सीधे संवाद के हिमायती हैं। उनकी कवायद रही है कि साहित्य और कलायें राजनीति के अंदर की चेष्टायें नहीं हैं बल्कि राजनीति के समानांतर चलने वाली चेष्टा है।
साथ ही बताया की मुक्तिबोध राजनीति की केन्द्रता को हटाकर आम जनमानस को स्थापित करते हैं। इसकी पहली सीढ़ी है मनुष्य निर्माण। सत्य का अन्वेषण करते हुए मुक्तिबोध सत्य की सार्थकता को व्यक्त करते हैं। सत्र में आलोचक मृत्युंजय ने कहा की मुक्तिबोध की कविताओं में “मै की आलोचना” है। वे आत्मसंघर्ष की बात विस्तार रूप में करते हैं। उनके पास भविष्य का नक्शा व समय की समिक्षा है।
कवि गोष्ठी का आयोजन





























