RAIPUR. छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में नवाचार करते हुए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल से कॉलेज संचालित करने का निर्णय लिया गया है। यह कॉलेज पिछड़े और अति पिछड़े इलाकों में संचालित होंगे। इसके लिए रियायती दर पर आर्थिक सुविधाएं और सरकार से अनुदान भी मिलेगा।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक और नवाचार करते हुए दुर्गम इलाकों में PPP मॉडल से कॉलेज संचालित करने का निर्णय लिया गया है। इससे अति पिछड़े और सुदूर तथा दुर्गम इलाकों तक भी उच्च शिक्षा की रोशनी पहुंच सकेगी। प्रस्तावित PPP मॉडल में यह व्यवस्था प्रारंभ से ही निजी कॉलेजों को दी जाएगी। इस संबंध में प्रदेश सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है। PPP मॉडल से संचालित होने वाली यह योजना अब तक आरंभ की गई योजनाओं से अलग होगी और अपनी तरह से पहली योजना भी होगी।

आरंभ से मिलेगा अनुदान
अब तक छत्तीसगढ़ में उन्हीं अशासकीय महाविद्यालयों को उपर्युक्त अनुदान दिए जाते रहे जिन्हें संचालित होते न्यूनतम 10 वर्ष हो चुके हो। मगर अब प्रस्तावित PPP मॉडल में यह व्यवस्था प्रारंभ से ही निजी कॉलेजों को दी जाएगी।
बढ़ेगा उच्च शिक्षा का दायरा
इस योजना से दुर्गम और सुदूर इलाकों में प्रतिकूल स्थिति से उभरने और उच्च शिक्षा के सर्वांगीण विकास के लिए PPP मॉडल को आकार दिया गया है।
प्रवेश के सकल अनुपात बढ़ाने हुआ निर्णय
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में बीते दिनों हुई केबिनेट की बैठक में राज्य के सकल प्रवेश अनुपात को बढ़ाने पर चर्चा हुई। राज्य के पिछड़े इलाकों के युवाओं को गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने PPP मॉडल के प्रस्तावित प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

मिलेगा अनुदान
PPP मॉडल के अंतर्गत खोले जाने वाले महाविद्यालयों को दी जाने वाली निश्चित पूंजी निवेश पर सब्सिडी दी जाएगी। अति पिछड़े इलाके में ढ़ाई करोड़ रुपए और पिछड़े क्षेत्र में कॉलेज को 1.75 करोड़ रुपए सब्सिडी दी जाएगी।
रियायती दर पर मिलेगी भूमि
इसी तरह न्यूनतम 10 एकड़ भूमि 30 वर्ष की लीज़ पर 50% रियायती दर से शासन द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। अधोसंरचना निर्माण के लिए ली गई अधिकतम 500 करोड़ रुपए के ऋण पर ब्याज की राशि का 50 प्रतिशत भुगतान शासन द्वारा किया जाएगा। स्थापना व्यय पर भी सरकार अनुदान देगी।





































