13 दिसंबर से शुरू हो रहा छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र हो सकता है हंगामेदार, जानिए क्यों

रायपुर। इस बार 13 दिसंबर से शुरू होने जा रहा छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र काफी हंगामेदार होने के आसार दिख रहे हैं। भाजपा पहले झीरम घाटी मुद्दे को लेकर -नए जांच आयोग गठन का मामला जोर-शोर से उठा सकती है। वहीं, कवर्धा मामले को लेकर भी सदन में हंगामा हो सकता है। जिस तरह भाजपा ने कवर्धा मुद्दे को लेकर सड़क तक लड़ाई लड़ रही है, उसे देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि यह मामला सदन में भी गूंजेगा। धर्मांतरण के मुद्दे पर भी विपक्ष बार-बार राज्य में धर्मांतरण बढ़ने का आरोप लगा रहा है। वहीं, कांग्रेस भी लगातार भाजपा पर निशाना साधते हुए कह रही है कि भाजपा शासनकाल में अधिक धर्मांतरण हुए हैं।

इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सत्र में सवाल लगाने के लिए विधायकों को 16 नवंबर से 24 नवंबर तक का समय दिया गया था। इसमें 24 नवंबर को सबसे ज्यादा 373 सवाल लगाए गए हैं। तारांकित और अतारांकित सहित कुल 755 सवाल लगाए गए हैं, जबकि सत्र महज पांच दिनों तक ही चलने वाला है। बताया जा रहाहै कि सत्र के दौरान चार बैठकें होंगी। विधानसभा सत्र से पहले ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र को भाजपा ने छोटा बताया है।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री रवींद्र चौबे ने कहा कि शीतकालीन सत्र की परंपरा है कि पांच से छह बैठकें होती है। इस बार भी 13 से 17 दिसंबर तक सत्र चलेगा। राजीव गांधी न्याय योजन, गोधन न्याय योजना और राजीव गांधी युवा मितान क्लब जैसे विषयों को लेकर सदन में जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुद्दे जो भी आएं, सरकार तैयार है।

बताते चलें कि पूर्व में जारी की गई अधिसूचना में कहा गया था कि छत्तीसगढ़ विधानसभा का 12वां सत्र 13 दिसंबर से शुरू होकर 17 दिसंबर तक चलेगा। अनुपूरक बजट सहित कई विधेयकों को लेकर सत्र में चर्चा होगी। पहले दिन दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।