मामले में पहले राजपुर के प्रथम श्रेणी न्यायालय ने 28 मार्च 2019 को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपियों ने इस फैसले को सत्र न्यायालय बलरामपुर में चुनौती दी।
सत्र न्यायालय ने 14 सितंबर 2021 को ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए साक्ष्यों के अभाव में दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। इसके खिलाफ पीड़िता ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। Read More





























