इतिहास में ऐसा पहली बार, मांगों की पूर्ति के लिए मनरेगा कर्मियों की 400 किलोमीटर की दांडी यात्रा, रात तक जारी रहा राजधानी पहुंचने का सिलसिला

मांगों की पूर्ति के लिए मनरेगा कर्मी दांडी यात्रियों का काफिला रायपुर की ओर कूच कर चुके हैं। दांडी यात्रा अब तिरंगा यात्रा में तब्दील हो चुका है। इसमें पांच हजार से अधिक यात्रियों का दल शामिल है।

tirandaj.com
मनरेगा कर्मी दांडी यात्रियों का काफिला रात तक रायपुर पहुंचना शुरू हो गया है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहला अवसर है जब कोई कर्मचारी संगठन अपनी मांग की पूर्ति के लिए 400 किलोमीटर की दांडी यात्रा में हैं। आश्चर्य की बात ये भी है कि इसमें पूरे प्रदेश भर से पांच हजार मनरेगा कर्मी शामिल हो रहे हैं। काफिला आज राजधानी रायपुर की ओर कूच कर चुके हैं। कुछ पहुंच चुके हैं और कुछ रात तक पहुंचेंगे।

इधर मांगों की पूर्ति के लिए मनरेगा कर्मी दांडी यात्रियों का काफिला रायपुर की ओर कूच कर चुके हैं। वहीं दांडी यात्रा अब तिरंगा यात्रा में तब्दील हो चुका है। इसमें पांच हजार से अधिक यात्री शामिल हैं।

बता दें कि लंबे समय से मनरेगा अधिकारी-कर्मचारी नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। पर सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। इसी बात से नाराज अधिकारी-कर्मचारी दंतेवाड़ा से 400 किलोमीटर पैदल चल कर रायपुर के लिए निकले हैं। दांडी यात्रा के रूप निकली यात्रा अब तिरंगा यात्रा में तब्दील हो चुकी है। काफिला आज राजधानी रायपुर की ओर कूच कर चुके हैं। कुछ पहुंच चुके हैं और कुछ रात तक पहुंचेंगे।

tirandaj.com
मांगों को लेकर दांडी तिरंगा यात्रा में शामिल मनरेगा अधिकारी-कर्मचारी।

बता दें कि मांगों को लेकर अधिकारी-कर्मचारी इतने परेशान हो चुके हैं कि उन्हें भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी है। इसीलिए भारी संख्या में शामिल दांडी यात्री तिरंगा लेकर एक किलोमीटर लम्बी लाइन लगाकर शाम को रायपुर बूढ़ा तालाब पहुंचे।

कर्मचारी संगठनों के अनुसार छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहला आंदोलन है जिसमें कुछ कर्मचारियों द्वारा 400 किलोमीटर की दांडी यात्रा निकाली गई है। इसमें से रायपुर आते-आते इनकी संख्या 5000 से अधिक हो गई है। दांडी यात्रा के नेतृत्वकर्ता सूरज सिंह ठाकुर ने बताया कि अन्य जिलों से भी मनरेगा कर्मचारी दांडी यात्रा में अपनी सहभागिता देने के लिए निकल रहे हैं।

ठाकुर के अनुसार निमोरा से हमारी यात्रा अब तिरंगा रैली का रूप ले ली है। हमें यह विश्वास है कि संवेदनशील मुख्यमंत्री हमारी जरूर सुनेंगे। यह मनरेगा कर्मी अपने नियमितिकरण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।