BILASPUR. मंगलवार की दोपहर बिलासपुर जोनल स्टेशन के पास एक ट्रैक पर लोकल ट्रेन गुजर रही थी। उससे चंद दूरी पर ही उसी ट्रैक पर एक मालगाड़ी आ गई। आसपास से गुजरने वाले लोगों के अलावा ट्रेन में सवार यात्रियों की हलक सूख गई। जबकि ये रेलवे की नई टेक्नोलॉजी ऑटोमेटिक सिग्नलिंग का कमाल है। इसमें एक ही सेक्शन में दो क्या, तीन गाड़ियां एक साथ एक ही समय पर आ सकती हैं। अब इसकी तस्वीरों को लोग वायरल कर रहे हैं और मान रहे हैं कि बड़ी घटना टल गई।

आपको बता दें कि दोपहर 2:30 बजे कोरबा— बिलासपुर लोकल ट्रेन कोरबा से आती हुई बिलासपुर स्टेशन से पहले लालखदान फाटक के पास पहुंची थी। फिर उसके पीछे उसी ट्रैक पर एक मालगाड़ी उसी दिशा में पीछे से आती हुई नजर आ गई। ओवरब्रिज के नीचे मौजूद लोगों के साथ ही ट्रेन में बैठे लोग भी खिड़की से झांककर हैरान रह गए। जैसे ही इसकी जानकारी ट्रेन के अंदर बैठे लोगों को हुई तो वे भी घबरा गए। हालांकि कुछ पास आकर मालगाड़ी खड़ी हो गई। लेकिन, तब तक लोगों की सांसें अटकी रहीं। अब जब इस बारे में रेल अफसरों से बात की गई तो उन्होंने इसे सामान्य बात बताया। इसके पीछे का कारण ये बताया गया कि ये आधुनिक तकनीक है, जिसमें एक सेक्शन में तीन ट्रेनें भी आ सकती हैं और किसी भी तरह का खतरा इससे नहीं रहता है।
ये है ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम
ऑटोमेटिक ब्लॉक सिगनलिंग सिस्टम यानी स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली। इसमें दो स्टेशनों के बीच प्रत्येक एक किलोमीटर की दूरी पर सिग्नल लगाए गए हैं। इस नई व्यवस्था में स्टेशन यार्ड के एडवांस स्टार्टर सिग्नल से आगे प्रत्येक एक किलोमीटर पर सिग्नल लगाए गए हैं। इन सिग्नलों के सहारे ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे चलती रहती हैं। यदि किसी कारण से आगे वाले सिग्नल में तकनीकी समस्या आ गई तो पीछे चल रही ट्रेनों को भी सूचना मिल जाएगी। इससे ट्रैक पर मौजूद पीछे की ट्रेनें जहां के तहां रुक जाएंगी। इस सिस्टम के लागू होने के बाद से एक ही रूट पर एक किलोमीटर के अंतर पर एक के पीछे एक ट्रेनें चल सकती हैं।
ये है फायदा
जहां तक इस नए सिस्टम के फायदे की बात करें तो इससे रेल लाइनों पर ट्रेनों की स्पीड के साथ ही संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। कहीं पर भी खड़ी ट्रेन को निकलने के लिए आगे चल रही ट्रेन के अगले स्टेशन तक पहुंचने का भी इंतजार नहीं करना पड़ता। स्टेशन यार्ड से ट्रेन के आगे बढ़ते ही ग्रीन सिग्नल मिलता जाएगा। इस तरह एक ब्लॉक सेक्शन में एक के पीछे दूसरी ट्रेन आसानी से चल सकती है। साथ ही ट्रेनों के लोकेशन की जानकारी भी मिलती रहेगी।







































