WASHINGTON NEWS. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी टकराव को खत्म करने के लिए 9 अप्रैल 2026 की समय-सीमा तय कर दी है। इस बीच ट्रंप ने बड़ा संकेत देते हुए कहा है कि अगले 5 दिनों तक ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर कोई हमला नहीं किया जाएगा, जिससे कूटनीतिक समाधान की संभावना मजबूत होती दिख रही है। ट्रंप के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और करीब 15 अहम मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने साफ किया कि आने वाले दिनों में यह तय होगा कि क्या कोई व्यापक समझौता संभव है या नहीं।

शुरुआत में ईरान ने अमेरिका से बातचीत से इनकार किया था, लेकिन अब उसने स्वीकार किया है कि दोनों देशों के बीच बैक-चैनल डायलॉग जारी है। हालांकि, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने ट्रंप को धोखेबाज बताते हुए उनके बयानों को खारिज किया है और कहा कि इससे ईरान का रुख नहीं बदलेगा। ट्रंप ने कहा कि अगर समझौता होता है तो वैश्विक तेल कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है।

इसके साथ ही ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान का नेतृत्व लगभग खत्म हो चुका है और मोज्तबा खामेनेई के लापता होने की बात कही, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इस हफ्ते अमेरिका-ईरान के बीच हाई लेवल बैठक हो सकती है। इसमें तुर्किए और मिस्र मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जेडी वेंस कर सकते हैं, जबकि व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ से कई देशों के प्रतिनिधियों ने बातचीत की है। आसिम मुनीर ने ट्रंप से बात की है, वहीं इजरायल के अधिकारियों का मानना है कि इस सप्ताह बातचीत निर्णायक मोड़ ले सकती है। हालांकि, दोनों पक्षों के बयानों में विरोधाभास भी साफ दिखता है, जिससे यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि 9 अप्रैल तक वाकई शांति समझौता हो पाएगा या नहीं।

भारत की चिंता: ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस
भारत भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत कर ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर को लेकर चिंता जताई है। बता दें कि अमेरिका का अल्टीमेटम, 5 दिन की सैन्य राहत और इस्लामाबाद में संभावित वार्ता—ये सभी संकेत देते हैं कि जंग अब निर्णायक मोड़ पर है।





































