मोहित जाटवर, MUNGELI. होली भले ही तमाम लोगों के लिए रंगों का त्योहार हो, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या कम नहीं है, जिनके लिए होली यानी दारू पार्टी है। लेकिन जब शराब दुकानें बंद रखने का सरकारी फरमान जारी हुआ तो सुरा प्रेमी टेंशन में आ गए। दारू प्रेमियों के इसी मुहब्बत का फायदा उठाया सरकारी दुकान के सेल्समैन भाइयों ने। मुंगेली के ग्राम कंतेली स्थित शराब दुकान में तय रेट से कहीं ज्यादा दाम पर शराब बेची गई। हालांकि आबकारी अधिकारियों से इसकी मौखिक शिकायत की गई, लेकिन दुकानों में दारू के जरिए वसूली जा रही होली की मिठाई ने अफसरों के भी हाथ बांध दिए।

आयुक्त आबकारी रायपुर को इस संबंध में फ़ोन पर सूचना दी गई उन्होंने तत्काल जांच करने एवं शिकायत सही पाए जाने पर सम्बंधित कर्मचारियों को टर्मिनेट करने जैसी कार्रवाई करने की बात कही। ओवर रेट पर बिक्री का खुलासा तब हुआ जब कंतेली के एक निकटवर्ती ग्राम रतियापारा निवासी गनपत पात्रे अपने साथी के साथ शराब दुकान पहुँचा। उसने सेल्समैन से बियर मांगी। इस पर एमआरपी 200 रुपये लिखी थी, लेकिन सेल्समैन द्वारा 250 रुपये मांगे गए। विरोध करने पर सेल्समैन ताव में आ गया और बोला कि लेना है तो ले, नहीं तो निकलो।

लगभग घंटे भर बाद भी नही पहुंचे अधिकारी
मोबाइल के माध्यम से सम्बंधित अधिकारियों को सूचना दी गई, लेकिन लगभग 1 घण्टे इंतजार करने के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं आया। इस पर लोग चर्चा करते रहे कि लगता है हिस्सा ऊपर पहुंच गया।
उच्च कार्यालय के दखल के बाद तत्परता
इसकी शिकायत रायपुर उच्च अधिकारियों के पास पहुंची। इसके बाद कहीं जाकर इस मामले में जांच एवं कड़ी कार्यवाही करने की बात कही गयी।

सीसी टीवी फुटेज से हो सकती है आरोपों की जांच
लगभग 3 दिवस बीत जाने के बाद भी अधिकारी जांच करने का हवाला दे रहे है। जबकि उनको बिक्री की टाइमिंग भी बता दी गई है। इससे आसानी से साबित हो सकता है कि आरोप सत्य है या निराधार। मुंगेली आबकारी विभाग यदि दो दिन का सीसी टीवी चेक करती है तो सच सामने आ जाएगा।
सुबह से शाम तक ओवर रेट में बिक्री
सरकार द्वारा शराब की कीमत निर्धारित करने के बाद इनके द्वारा 1 बियर में 50 रुपये अतिरिक्त कमाया जा रहा है। ऐसे में आरोप अगर सही पाए जाते है तो इसका अर्थ ये है कि अलग अलग ब्रांड में अतिरिक्त पैसे लेकर ये लोग 1 दिन में ही लाखों रुपये लूट रहे हैं।

सरकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास
सरकार से सभी ब्रांड के रेट फिक्स कर दिए हैं। कोई कंफ्यूज़न न हो इसके लिए एमआरपी का टैग लगा दिया गया है। यदि इसके बाद भी अधिक कीमत पर शराब बेची जा रही है तो कहीं न कहीं सरकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास है। बहरहाल उच्चाधिकारियों ने तो कार्यवाही करने की बात कही है, लेकिन देखना यह होगा कि इन पर क्या कार्यवाही होती है।




































