WASHINGTON NEWS. अमेरिका में टैरिफ नीति को लेकर चल रही कानूनी जंग ने नया मोड़ ले लिया है। राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा आपातकालीन कानून के तहत लगाए गए टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। इस फैसले के पीछे जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है भारतीय मूल के वरिष्ठ वकील Neal Katyal, जिन्होंने अदालत में राष्ट्रपति के अधिकारों को चुनौती दी। नील कात्याल ने कोर्ट में तर्क दिया कि व्यापार को विनियमित करने की शक्ति अमेरिकी कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास असीमित रूप से।

इस दौरान नील कात्याल ने कहा कि आपातकालीन प्रावधानों का इस्तेमाल मनमाने तरीके से कर टैरिफ लागू करना संविधान की भावना के खिलाफ है। अदालत ने उनकी दलीलों पर सहमति जताते हुए टैरिफ को निरस्त कर दिया। बता दें कि शिकागो में भारतीय अप्रवासी परिवार में जन्मे कात्याल के पिता इंजीनियर और मां डॉक्टर हैं। उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट के जज स्टीफन ब्रेयर के क्लर्क रहे। वर्तमान में वे मिलबैंक एलएलपी में पार्टनर और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर में प्रोफेसर हैं।

कात्याल, पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama के कार्यकाल में 2010 में अमेरिका के कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए गए थे। इस भूमिका में उन्होंने संघीय सरकार का सुप्रीम कोर्ट और अपीलीय अदालतों में प्रतिनिधित्व किया। वे अब तक 50 से अधिक मामलों में सुप्रीम कोर्ट के सामने पैरवी कर चुके हैं।

पहले भी ट्रंप नीतियों को दी चुनौती
यह पहला मौका नहीं है जब कात्याल ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों को अदालत में चुनौती दी हो। 2017 में उन्होंने ट्रैवल बैन के खिलाफ भी पैरवी की थी। इसके अलावा वे 1965 के वोटिंग राइट्स एक्ट की संवैधानिक वैधता की रक्षा कर चुके हैं और जॉर्ज फ्लॉयड मामले में विशेष अभियोजक की भूमिका निभा चुके हैं।

सम्मान और उपलब्धियां
नील कात्याल ‘Impeach: The Case Against Donald Trump’ नामक पुस्तक के लेखक भी हैं। उन्हें अमेरिकी न्याय विभाग के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘एडमंड रैंडॉल्फ अवॉर्ड’ से नवाजा जा चुका है। ‘द अमेरिकन लॉयर’ ने उन्हें 2017 और 2023 में ‘लिटिगेटर ऑफ द ईयर’ चुना, जबकि फोर्ब्स ने 2024 और 2025 में अमेरिका के शीर्ष 200 वकीलों की सूची में शामिल किया।


































