BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवाद के एक मामले में मानवीय संवेदनाओं और कानून की मूल भावना को सर्वोपरि रखते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत, भले ही बच्चा अवैध संतान की श्रेणी में आता हो, फिर भी वह अपने पिता से भरण-पोषण पाने का कानूनी हकदार है।

बेमेतरा जिले के एक युवक की शादी अप्रैल 2016 में हुई थी। शादी के महज पांच महीने बाद ही पत्नी ने बच्चे को जन्म दे दिया। पति का आरोप था कि शादी से पहले उनके बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं थे, इसलिए वह बच्चा उसका नहीं है। इस आधार पर पति ने पत्नी से रिश्ता तोड़ लिया।

फैमिली कोर्ट और हाईकोर्ट का रुख
फैमिली कोर्ट ने पहले माना था कि पत्नी शादी से पहले गर्भवती थी और इसे पति के साथ ‘क्रूरता’ मानते हुए तलाक की डिक्री जारी कर दी थी। कोर्ट ने पत्नी का गुजारा भत्ता तो बंद कर दिया, लेकिन बच्चे के लिए 1,000 रुपये मासिक भत्ता जारी रखने का आदेश दिया। पति ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए तर्क दिया कि जब बच्चा उसका जैविक पुत्र नहीं है, तो वह उसे भत्ता क्यों दे?

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
चीफ जस्टिस की सिंगल बेंच ने पति की याचिका को खारिज करते हुए कहा कानून का मुख्य उद्देश्य समाज में बच्चों को बेसहारा होने और दर-दर भटकने से बचाना है। धारा 125 एक कल्याणकारी प्रावधान है, जो बच्चों को सुरक्षा प्रदान करता है।




































