BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2000 करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाला मामले में आरोपी सौम्या चौरसिया की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।
सौम्या चौरसिया की ओर से गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट में अग्रिम जमानत की गुहार लगाई गई थी। हालांकि, ACB-EOW (एसीबी-ईओडब्ल्यू) ने इस मांग का कड़ा विरोध किया। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद याचिका को खारिज करने का निर्णय सुनाया।

सिंडिकेट के जरिए घोटाले का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल के दौरान एक संगठित सिंडिकेट के माध्यम से इस घोटाले को अंजाम दिया गया था। इस सिंडिकेट में मुख्य रूप से शामिल थे अनिल टुटेजा तत्कालीन आईएएस अफसर। ए.पी. त्रिपाठी आबकारी विभाग के पूर्व एमडी। अनवर ढेबर कारोबारी। सौम्या चौरसिया पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव।

कोयला घोटाले में भी हैं आरोपी
गौरतलब है कि सौम्या चौरसिया कोयला घोटाला मामले में भी मुख्य आरोपियों में से एक हैं। इससे पहले मई के महीने में उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ जमानत दी थी, जिसमें उन्हें राज्य से बाहर रहने के निर्देश भी दिए गए थे।

गिरफ्तारी और कोर्ट में पेशी
ED ने 16 दिसंबर को सौम्या चौरसिया को पूछताछ के लिए बुलाया था, जिसके बाद उसी शाम उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अब उन्हें शराब घोटाला मामले में पूछताछ के लिए पुनः कोर्ट में पेश किया जाएगा।




































