NEW DELHI NEWS. मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ी राहत की खबर आई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारी मात्रा में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर निकले दो बड़े टैंकर सफलतापूर्वक ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को पार कर भारतीय तटों पर सुरक्षित पहुंच गए हैं। इन जहाजों में करीब 94,000 टन एलपीजी मौजूद है, जो देश की रसोई गैस आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।

6 दिन के सफर के बाद पहुंची खेप
जानकारी के मुताबिक, पहला टैंकर ‘BW TYR’ 31 मार्च को मुंबई बंदरगाह पहुंचा। यह जहाज यूएई के रास अल खैमाह से रवाना हुआ था और करीब 6 दिनों का सफर तय कर भारत पहुंचा है। वहीं, दूसरा टैंकर ‘BW ELM’ 1 अप्रैल को न्यू मैंगलोर तट के पास पहुंचा। इन दोनों जहाजों पर 50 से ज्यादा भारतीय नाविक तैनात थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, तनावपूर्ण माहौल के बावजूद अब तक कुल 8 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार करने में सफल रहे हैं।

ईरान का सख्त रुख: अमेरिका के लिए रास्ते बंद
एक तरफ जहाजों की सुरक्षित आवाजाही जारी है, तो दूसरी तरफ ईरान के कड़े बयानों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने स्पष्ट कर दिया है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ का रास्ता खुला तो रहेगा, लेकिन अमेरिका के लिए इसे बंद रखा जाएगा।

अजीजी ने तंज कसते हुए कहा कि “47 साल की मेहमाननवाजी अब खत्म हो चुकी है।” उन्होंने आगे कहा कि यह समुद्री रास्ता अब सिर्फ उन्हीं देशों के लिए उपलब्ध होगा जो ईरान द्वारा बनाए गए नए नियमों का पालन करेंगे। अजीजी ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने ‘रेजीम चेंज’ का जो सपना देखा था, वह जमीन पर तो नहीं लेकिन समुद्र के नियमों में जरूर बदल गया है।

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस का व्यापार इसी संकरे समुद्री रास्ते से होता है। ईरान की इस धमकी और अमेरिका के साथ जारी टकराव के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका गहरा गई है। हालांकि, भारतीय जहाजों का सुरक्षित पहुंचना भारत की कूटनीतिक और लॉजिस्टिक कामयाबी माना जा रहा है।





































