RTE Admission : छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत प्रवेश प्रक्रिया को लेकर निजी स्कूलों ने बड़ा रुख अपनाया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने ऐलान किया है कि इस साल वे RTE के तहत होने वाले एडमिशन में सहयोग नहीं करेंगे।

संगठन का कहना है कि उनकी लंबित मांगों पर सरकार की ओर से लगातार अनदेखी की जा रही है, जिसके चलते उन्हें यह निर्णय लेना पड़ा। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता के मुताबिक, पिछले 14 वर्षों से RTE के तहत मिलने वाली फीस प्रतिपूर्ति में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

6000 से ज्यादा स्कूलों पर असर
इस फैसले का असर प्रदेश के 6000 से अधिक निजी स्कूलों पर पड़ेगा। ये सभी स्कूल RTE के तहत चयनित छात्रों के एडमिशन—चाहे वह लॉटरी के माध्यम से हो या ऑनलाइन—में भाग नहीं लेंगे।

संगठन ने बताया कि वर्तमान में प्रतिपूर्ति राशि वर्ष 2011 से ही तय है। कक्षा 1 से 5 तक ₹7000, कक्षा 6 से 8 तक ₹11,400 और कक्षा 9 से 12 के लिए (2018 से) ₹15,000 प्रति छात्र दिया जाता है। बढ़ती महंगाई और खर्चों के बावजूद इस राशि में कोई संशोधन नहीं होने से स्कूलों की परेशानी बढ़ गई है।
हाईकोर्ट का खटखटाया था दरवाजा
इस मुद्दे को लेकर एसोसिएशन ने 2025 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। कोर्ट ने सरकार को 6 महीने के भीतर फैसला लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

लगातार उपेक्षा से नाराज होकर संगठन ने मार्च में ही असहयोग आंदोलन शुरू करने का ऐलान कर दिया था। इसके तहत स्कूल शिक्षा विभाग के नोटिस और पत्रों का जवाब भी नहीं दिया जा रहा है।
गरीब बच्चों पर पड़ेगा असर
RTE Admission : संगठन ने चेतावनी दी है कि इस फैसले का सीधा असर गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों पर पड़ेगा, जो RTE के माध्यम से निजी स्कूलों में पढ़ाई करते हैं। हालांकि, उनका कहना है कि मौजूदा प्रतिपूर्ति दर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना संभव नहीं रह गया है।

RTE Admission : फीस प्रतिपूर्ति की दरों के पुनर्निर्धारण की मांग
निजी स्कूल प्रबंधन ने सरकार से मांग की है कि फीस प्रतिपूर्ति की दरों का पुनर्निर्धारण किया जाए, अन्य राज्यों की तरह व्यावहारिक राशि तय की जाए और लंबित मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाए। जब तक इन मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक RTE प्रवेश प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया जाएगा।




































