NEW DELHI NEWS. लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भारी हंगामे के बीच खारिज हो गया। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया, जिसके बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला।

अमित शाह ने कहा कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना बेहद अफसोसजनक है, क्योंकि स्पीकर किसी एक दल के नहीं होते, बल्कि पूरे सदन के होते हैं। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बिना तंज कसते हुए कहा कि यहां नियमों के तहत बोलना पड़ता है और सदन में कई वरिष्ठ सदस्य मौजूद हैं। शशि थरूर और बालू साहब जैसे वरिष्ठ नेता भी बैठे हैं, उन्हें अपने साथियों को नियमों की जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो सदस्य नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनका माइक बंद किया जाएगा।

नोटिस में बताई गई विपक्ष की गलतियां
गृहमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में वर्ष 2026 की जगह 2025 लिखा गया था। जब यह गलती विपक्ष के ध्यान में लाई गई तो उन्होंने नोटिस वापस ले लिया। इसके बाद दिए गए दूसरे नोटिस में केवल गौरव गोगोई के ही असली हस्ताक्षर थे, जबकि अन्य सांसदों के हस्ताक्षर जेरॉक्स कॉपी में थे। ऐसे में नोटिस को नियमों के आधार पर खारिज किया जा सकता था, लेकिन फिर भी स्पीकर कार्यालय ने विपक्ष को अपनी गलती सुधारने का मौका दिया।

‘सदन आपसी विश्वास से चलता है’
अमित शाह ने कहा कि संसद आपसी विश्वास और नियमों के आधार पर चलती है। स्पीकर पक्ष और विपक्ष दोनों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि यह सदन कोई मेला नहीं है, बल्कि इसे तय नियमों के अनुसार ही चलाना पड़ता है। अगर कोई सदस्य नियमों की अनदेखी करेगा तो स्पीकर का कर्तव्य है कि उसे रोके।

शाह ने यह भी कहा कि ये नियम किसी एक सरकार ने नहीं बनाए, बल्कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय से ही लागू हैं। उन्होंने कहा कि सदस्यों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाना बेहद निंदनीय है।



































