NEW DELHI NEWS. 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद पश्चिम एशिया में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। जवाबी कार्रवाई में तेहरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्रीय सैन्य अड्डों को निशाना बनाए जाने से संघर्ष बहुस्तरीय रूप ले चुका है। इसी बीच हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबोने की खबर ने तनाव और बढ़ा दिया है। बताया गया है कि इस घटना में 87 शव बरामद किए गए। संघर्ष के बाद ईरान में मृतकों की संख्या 1,045 तक पहुंचने का दावा किया गया है।

लेबनान में 60 से अधिक, इजरायल में करीब एक दर्जन, जबकि छह अमेरिकी सैनिकों की भी मौत की सूचना है। हालात ऐसे हैं कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ा कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया है। यह टकराव अब केवल सीमित सैन्य कार्रवाई नहीं रह गया, बल्कि नेतृत्व ढांचे, मिसाइल ठिकानों और परमाणु कार्यक्रमों को निशाना बनाते हुए अनिश्चितकालीन संघर्ष में बदलता दिख रहा है।

10 बिंदुओं में समझें पूरा घटनाक्रम
- मौतों का आंकड़ा बढ़ा
क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान में 1,045, लेबनान में 50 से अधिक, इजरायल में 11, जॉर्डन में 5, कुवैत में 4, यूएई में 3 और बहरीन व ओमान में एक-एक मौत दर्ज की गई है। कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की जान गई।
- सुरक्षा तंत्र पर सीधा वार
इजरायल और अमेरिका ने ईरान के आंतरिक सुरक्षा कमांड और ‘बसीज’ बल से जुड़ी इमारतों को निशाना बनाया। मकसद ईरान के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को कमजोर करना बताया जा रहा है।
- क़ोम में अहम ठिकाना निशाने पर
ईरानी सरकारी टीवी ने तेहरान और क़ोम में ध्वस्त इमारतों के दृश्य प्रसारित किए। क़ोम स्थित उस परिसर को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई, जहां धार्मिक नेताओं का पैनल अगले सर्वोच्च नेता के चयन की प्रक्रिया में शामिल था।

- एयर डिफेंस और ड्रोन नेटवर्क को नुकसान
हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और ड्रोन ठिकानों को भारी क्षति पहुंचने का दावा किया गया है।
- खाड़ी देशों तक फैला दायरा
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन, कुवैत और इजरायल की ओर मिसाइलें दागीं। इससे संघर्ष ईरान की सीमाओं से बाहर फैल गया।
- होरमुज जलडमरूमध्य पर असर
रणनीतिक रूप से अहम होरमुज जलडमरूमध्य में एक मालवाहक जहाज पर मिसाइल हमले के बाद आग लगने की घटना सामने आई। तेल टैंकरों की आवाजाही 90 प्रतिशत तक घटने का दावा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया।

- ऑपरेशन की समयसीमा अनिश्चित
अमेरिकी रक्षा विभाग ने संकेत दिया है कि सैन्य अभियान की कोई तय समयसीमा नहीं है। यह कई हफ्तों तक जारी रह सकता है।
- हमले की पूर्व योजना
इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा कि यह कार्रवाई मूल रूप से जून 2026 के लिए निर्धारित थी, लेकिन विशेष परिस्थितियों के कारण फरवरी में ही शुरू की गई।

- यात्री और शिपिंग संकट
मध्य पूर्व में लाखों यात्री फंसे हुए हैं। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हुई हैं और समुद्री शिपिंग नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित है।
- वैश्विक बाजारों में घबराहट
तेल की कीमतों में उछाल के चलते दुनिया भर के शेयर बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।


































