NEW DELHI NEWS. मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण एशियाई देशों में गैस और कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। इसी बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। एलपीजी (LPG) की कमी के बीच अब बड़े पैमाने पर गैस की आपूर्ति शुरू हो गई है, जिससे घरेलू और औद्योगिक जरूरतों को राहत मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार (22 मार्च) को ‘Pyxis Pioneer’ नाम का एलपीजी टैंकर न्यू मंगलुरु बंदरगाह पहुंच चुका है। यह जहाज करीब 16,714 टन एलपीजी लेकर आया है।

सिंगापुर ध्वज वाला यह टैंकर 14 फरवरी को नीदरलैंड्स से रवाना हुआ था और यहां Aegis Logistics Limited के लिए गैस उतारेगा। आने वाले दिनों में न्यू मंगलुरु पोर्ट पर एलपीजी की बड़ी खेप पहुंचने वाली है। 25 मार्च को ‘Apollo Ocean’ टैंकर करीब 26,687 टन एलपीजी लेकर पहुंचेगा। यह गैस Indian Oil Corporation Limited और Bharat Petroleum Corporation Limited के लिए होगी। 29 मार्च को अमेरिका से एक और टैंकर करीब 30,000 टन एलपीजी लेकर आएगा।

यह खेप Hindustan Petroleum Corporation Limited को मिलेगी। इसके अलावा, पहले 18 मार्च को आने वाला ‘Shivalik’ टैंकर अपनी एलपीजी खेप गुजरात के वाडिनार पोर्ट पर ही दूसरे जहाज को ट्रांसफर कर चुका है। मंगलुरु स्थित HPCL का एलपीजी प्लांट इस गैस को बॉटलिंग प्लांट्स तक भेजता है। वहां से सिलेंडरों के जरिए घरेलू उपभोक्ताओं तक सप्लाई होती है, जबकि पाइपलाइन के माध्यम से बेंगलुरु सहित अन्य शहरों तक भी गैस पहुंचाई जाती है।

क्या है असर?
एलपीजी की कमी से जूझ रहे बाजार को राहत
घरेलू सिलेंडर सप्लाई में सुधार की संभावना
इंडस्ट्री और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी फायदा

कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत ने वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था के जरिए स्थिति को संभालने की कोशिश तेज कर दी है। आने वाले दिनों में इन खेपों के पहुंचने से गैस संकट काफी हद तक कम हो सकता है।



































