RAIGHAR NEWS. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सरकारी आदिवासी कन्या छात्रावास में छात्राओं से मजदूरी कराने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में छात्राएं छात्रावास की दीवारों की पुताई करती और जान जोखिम में डालकर छज्जे पर चढ़कर सफाई करती नजर आ रही हैं।

यह घटना लैलूंगा ब्लॉक के कोड़सिया स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास की है। इस छात्रावास में कक्षा 6वीं से 10वीं तक की लगभग 40-45 छात्राएं रहकर पढ़ाई करती हैं। बताया जा रहा है कि छात्रावास के रखरखाव और रंगाई-पुताई के लिए हर साल शासन से 25 हजार रुपये का बजट आता है। लेकिन वायरल वीडियो में छात्राएं खुद बाल्टी में रंग घोलकर दीवारों की पुताई करती दिख रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान वहां कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था।

मामला तूल पकड़ने के बाद छात्रावास की वार्डन पूर्णिमा चौहान ने अपनी सफाई पेश की है। उनका कहना है कि रंगाई-पुताई के लिए मजदूर लगाए गए थे। वार्डन के मुताबिक, जब मजदूर काम खत्म करके चले गए थे, तब किचन का थोड़ा काम बचा था। उन्होंने कर्मचारी को साफ-सफाई के निर्देश दिए थे, लेकिन उनकी गैरमौजूदगी में प्यून ने छात्राओं से काम करवा लिया।

जांच के आदेश जारी
वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। विभाग के क्षेत्र संयोजक धर्मेंद्र बैस ने बताया कि सहायक आयुक्त के निर्देशानुसार मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच टीम मौके पर जाकर पूरी जानकारी जुटाएगी और रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

छात्रावास जैसे सुरक्षित स्थानों पर बच्चों से इस तरह का काम कराना बाल अधिकारों का उल्लंघन माना जा रहा है, जिससे स्थानीय अभिभावकों में भी आक्रोश है।




































