BHILAI NEWS. छत्तीसगढ़ में पहली बार थाने में बुजुर्गों की काउंसिलिंग शुरू गई है। यह बुजुर्गों को न्याय और परिवार से सम्मान दिलाने की खास पहल है। जो कि भिलाई महिला थाना में की जा रही है। खास बात यह है कि यह अन्याय के खिलाफ पुलिस की मुहिम किसी दंड के विधान से संचालित नहीं होगी बल्कि समझाइश देकर बुजुर्गों को न्याय और सम्मान दिलाया जाना है।

जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को चलना सिखाया, उन्हें पढ़ाया-लिखाया और अपने सपनों से बड़ा उनका भविष्य देखा, आज वही बुजुर्ग बुढ़ापे में अपनों से सम्मान नहीं, बल्कि अपमान और प्रताड़ना झेल रहे हैं। यह पीड़ा अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों की चुप दीवारों के भीतर भी पल रही है। और इस पीड़ा को लेकर बुजुर्ग न्याय की उम्मीद लेकर भिलाई महिला थाना पहुंचे हैं। ऐसे ही बुजुर्गों को न्याय और परिवार से सम्मान दिलाने महिला थाना में पहली बार बुजुर्गों की काउंसिलिंग शुरू गई है। छत्तीसगढ़ में पहली बार शुरू हुई इस विशेष काउंसलिंग में अब तक 17 आवेदन सामने आए हैं।

इन आवेदनों की सबसे दुखद पहलू यह है कि प्रताड़ना किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा नहीं, बल्कि उन्हीं बेटों और बहुओं द्वारा दी जा रही है। कहीं मां-बाप को घर से बाहर कर दिया गया, तो कहीं उन्हें भोजन, दवा और सम्मान तक के लिए तरसाया जा रहा है।

आज एएसपी विजय अग्रवाल की उपस्थिति में आज पांच मेम्बर्स की टीम ने बुजुर्गों की काउंसिलिंग शुरू की। डीएसपी भारती मरकाम ने बताया कि महिला थाना में नियुक्त काउंसलर इन मामलों को संवेदनशीलता के साथ सुनते हुए समाधान की कोशिश कर रहे हैं। उद्देश्य केवल कानूनी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि परिवारों के बीच संवाद स्थापित कर रिश्तों को दोबारा जोड़ना है। जहां संभव हो, वहां समझाइश और परामर्श के माध्यम से बच्चों को उनकी जिम्मेदारियों का अहसास कराया जा रहा है।




































