BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी’ को लेकर उठा विवाद अब कानूनी गलियारों में पहुंच गया है। सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर कड़ा सवाल पूछा है।
जस्टिस एन.के. व्यास की बेंच में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि पदेन अध्यक्ष को किस आधार पर और किस प्रक्रिया के तहत हटाया गया? कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई अब 12 फरवरी को तय की गई है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल का आरोप है कि वे भारत स्काउट गाइड के निर्वाचित अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं, लेकिन सरकार ने उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई का मौका दिए एकतरफा तरीके से पद से हटा दिया। उनकी दलीलें निम्नलिखित हैं उन्हें हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से असंवैधानिक है। पदेन अध्यक्ष का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, जिसे बीच में बिना ठोस आधार के नहीं खत्म किया जा सकता।

उन्होंने आरोप लगाया कि जंबूरी का आयोजन स्थल नवा रायपुर से बदलकर बालोद करना और 10 करोड़ रुपये के फंड को सीधे जिला शिक्षा अधिकारी को ट्रांसफर करना वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।
जंबूरी का महत्व और इतिहास
स्काउटिंग की दुनिया में ‘जंबूरी’ का अर्थ होता है ‘आनंदपूर्ण मिलन’। स्काउट आंदोलन की स्थापना 1907 में ब्रिटेन के लॉर्ड रॉबर्ट बेडन-पॉवेल ने की थी। दुनिया भर के स्काउट्स और गाइड्स को एक मंच पर लाकर आपसी सहयोग और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करना। इसमें 16 से 25 वर्ष की आयु के युवक (रोवर) और युवतियां (रेंजर) हिस्सा लेते हैं।

जहां एक तरफ बालोद में जंबूरी का आयोजन चल रहा है, वहीं दूसरी ओर अध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर मंत्री गजेंद्र यादव और सांसद बृजमोहन अग्रवाल के बीच की यह ‘सियासी जंग’ अब कोर्ट के फैसले पर टिकी है।




































