RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने संविदा पर कार्यरत लाइन परिचारकों के हित में दो अहम फैसले लिए हैं। पहला, उनके मानदेय में लगभग 33 प्रतिशत की वृद्धि की गई है और दूसरा, नियुक्ति आदेश में उल्लेखित 10 वर्ष की संविदा सेवा के बाद अनिवार्य सेवासमाप्ति की शर्त को समाप्त कर दिया गया है। यह निर्णय माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सहानुभूतिपूर्ण पहल और मार्गदर्शन में लिया गया। ट्रांसमिशन कंपनी के अध्यक्ष सुबोध कुमार सिंह तथा डिस्ट्रीब्यूशन व जनरेशन कंपनी के अध्यक्ष डॉ. रोहित यादव के निर्देश पर मुख्य अभियंता (मानव संसाधन) द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं।

नए आदेश के अनुसार संविदा लाइन परिचारकों का मूल मानदेय 15,600 रुपए प्रतिमाह निर्धारित किया गया है, जिस पर 5 प्रतिशत मैदानी भत्ता दिया जाएगा। इसके साथ ही अनुभव के आधार पर विशेष भत्ता भी प्रदान किया जाएगा, जो तीन से सात वर्ष के अनुभव के अनुसार चार अलग-अलग स्लैब में तय किया गया है। पहले लाइन परिचारकों को 14,645 रुपए प्रतिमाह फिक्स मानदेय मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 19,366 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है। इस तरह मासिक मानदेय में 4,721 रुपए की सीधी बढ़ोतरी हुई है।

इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब 10 वर्ष बाद संविदा समाप्त करने की बाध्यता नहीं रहेगी। कंपनी आवश्यकता और कार्य मूल्यांकन के आधार पर संविदा सेवा अवधि को एक-एक वर्ष के स्लैब में आगे बढ़ा सकेगी। अनुभव की गणना प्रथम नियुक्ति के ज्वाइनिंग दिनांक से की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत लाइन परिचारकों को पहली बार 800 रुपए प्रतिमाह पेट्रोल भत्ता भी दिया जाएगा, जिससे फील्ड ड्यूटी के दौरान होने वाले आवागमन खर्च में राहत मिलेगी।

यह व्यवस्था ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी, दोनों के संविदा लाइन परिचारकों पर समान रूप से लागू होगी। नई मानदेय संरचना 1 फरवरी 2026 से प्रभावी होगी। कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) अधिनियम के तहत अंशदान की सुविधा भी दी जाएगी। इस फैसले का विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने स्वागत किया है और इसे लाइन परिचारकों के मनोबल और कार्यक्षमता बढ़ाने वाला कदम बताया है।




































