AYODHA NEWS. उत्तर प्रदेश में एक और वरिष्ठ अधिकारी के इस्तीफे ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अयोध्या में तैनात राज्य जीएसटी विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में लिया है। बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे के बाद यह दूसरी इस्तीफे की घटना है।
दरअसल, इस्तीफा देने के बाद जब प्रशांत कुमार सिंह ने अपनी पत्नी को फोन किया, तो वे खुद को संभाल नहीं पाए। बातचीत के दौरान उनकी आवाज भर्रा गई, उनका गला भर आया और वे फफक-फफक कर रो पड़े। पत्नी से उन्होंने बस इतना कहा— “हां… हैलो… मैंने इस्तीफा दे दिया है। अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा।”

“जिसका नमक खाते हैं, उसका सिला अदा करना चाहिए”
पत्नी से बातचीत में डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि वे बीते दो दिनों से ठीक से सो नहीं पाए थे और मन बेहद व्यथित था। उन्होंने कहा— “जिसका नमक खाते हैं, उसका सिला अदा करना चाहिए। मैं उसी प्रदेश से वेतन लेता हूं और उसी सरकार के अधीन काम करता हूं। अगर उसी नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक बातें हों और मैं चुप रहूं, तो यह मेरे लिए संभव नहीं है।”
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी दो बेटियां हैं और वे चाहते हैं कि उनके बच्चे यह देखें कि उनका पिता सही और गलत के बीच खड़े होने से नहीं डरे। उनका कहना था कि यह फैसला किसी जोश और आवेग में नहीं बल्कि लंबे आत्ममंथन के बाद लिया गया है।

राज्यपाल को भेजा दो पन्नों का इस्तीफा
आपको बता दें कि प्रशांत कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित करते हुए भेजा है। दो पन्नों के इस पत्र में उन्होंने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने इन बयानों को अभद्र, अमर्यादित और अनर्गल बताते हुए लिखा है कि ऐसी टिप्पणियां केवल व्यक्तियों पर नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे, संविधान और जनादेश पर सीधा प्रहार हैं।
सरकारी अधिकारी होने के नाते उनका राजकीय धर्म
इस्तीफे में प्रशांत कुमार सिंह ने लिखा है कि एक सरकारी अधिकारी होने के नाते उनका भी एक राजकीय धर्म है। यह धर्म केवल फाइलें निपटाने या राजस्व जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था और नेतृत्व के सम्मान की रक्षा करना भी है, जिसके तहत वे कार्य करते हैं। उन्होंने लिखा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ सार्वजनिक मंचों से अपमानजनक भाषा का प्रयोग समाज में भ्रम, विद्वेष और अस्थिरता पैदा करता है। ऐसे समय में चुप रहना उन्हें अपने आत्मसम्मान के खिलाफ लगा।
मैं सिर्फ वेतनभोगी रोबोट नहीं हूं: प्रशांत कुमार
अपने पत्र में उन्होंने भावुक शब्दों में लिखा कि वे केवल एक वेतनभोगी रोबोट की तरह काम नहीं कर सकते। एक अधिकारी होने के साथ-साथ वे एक नागरिक, एक पिता और एक जागरूक व्यक्ति भी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह इस्तीफा किसी दबाव, निर्देश या राजनीतिक लाभ के लिए नहीं दिया गया है, बल्कि पूरी तरह उनकी अंतरात्मा की आवाज पर आधारित है।
अविमुक्तेश्वरानंद पर जातिवाद का जहर घोलने के लगाए आरोप
इस्तीफे में प्रशांत कुमार सिंह ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर समाज में जातिवाद का जहर घोलने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने लिखा कि ऐसे बयान प्रदेश और देश के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करते हैं। सदियों के संघर्ष के बाद देश ने संविधान के माध्यम से समानता और न्याय का रास्ता चुना है, ऐसे में विभाजनकारी भाषा का प्रयोग बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

पत्र के अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं हो जाता, तब तक वे अपने पद की सभी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करते रहेंगे। उन्होंने राजस्व वृद्धि और विभागीय कार्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह पत्र 27 जनवरी 2026 को अयोध्या से जारी किया गया है।
2023 में अयोध्या में पोस्टेड हैं प्रशांत कुमार
गौरतलब है कि प्रशांत कुमार सिंह की अयोध्या में पोस्टिंग वर्ष 2023 में हुई थी। वे राज्यकर विभाग में संभागीय उप आयुक्त (डिप्टी कमिश्नर) के पद पर कार्यरत थे। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उन्होंने संकेत दिया है कि वे सामाजिक कार्यों में अपने निजी संसाधनों से योगदान देंगे और समाज के लिए किसी न किसी रूप में काम करते रहेंगे।
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