MUNGELI NEWS. मुंगेली जिले का लोरमी विकासखंड इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यहां ठेकेदारों द्वारा यत्र-तत्र-सर्वत्र, यानी जहां भी खाली जगह मिली वहीं खुदाई कर उत्खनन का काम किया जा रहा है। चाहे वह निजी जमीन हो, आबादी क्षेत्र हो, सरकारी भूमि हो या फिर मृतकों की कब्र से मिट्टी निकालने का मामला—ठेकेदारों के बेखौफ हौसलों ने पूरी धरती हिला दी है। लोरमी के अधिकांश क्षेत्रों में यही स्थिति देखने को मिल रही है, जिस पर आम जनता की नजर तो है, लेकिन जिला खनिज अधिकारी और उनके अमले को यह सब नजर नहीं आ रहा। वहीं स्थानीय लोग अब विभाग और ठेकेदारों की मिलीभगत होने का आरोप लगा रहे हैं। इन आरोपों का खंडन करने के लिए विभाग की ओर से भी कोई ठोस भूमिका नजर नहीं आ रही है।

जिले में चिन्हित खदानों की संख्या बेहद सीमित है, ऐसे में बड़े पैमाने पर चल रहे निर्माण कार्यों में पीली मिट्टी और मुरुम आखिर कहां से लाई जा रही है, कितनी मात्रा में और किस स्रोत से मुरुम की खपत हो रही है। इससे विभाग को कोई सरोकार नहीं दिखता। ऐसे में खनिज विभाग के अधिकारियों पर सवाल उठना लाजमी है। शासन स्तर से स्वीकृत बड़े निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाले खनिज के लिए ठेकेदार को भुगतान से पहले रॉयल्टी पर्ची जमा करनी होती है। ठेकेदार औपचारिकता निभाने के लिए विभाग से पर्ची कटवा लेते हैं, लेकिन इसके बाद निर्माण स्थल के आसपास ही मिट्टी खोदकर निकाल ली जाती है। मौके पर कितना भी बड़ा गड्ढा क्यों न हो जाए, इससे किसी को कोई मतलब नहीं रहता।

शिकायतें होती हैं, पर कार्रवाई नहीं
अवैध उत्खनन से संबंधित शिकायतें विभाग को कई बार मिलती हैं, लेकिन विभाग के आला अधिकारी मौके पर जाने की जहमत नहीं उठाते। रेत उत्खनन के मामलों में भी विभाग की ओर से बड़ी कार्रवाई की अपेक्षा हमेशा बनी रहती है, लेकिन ठोस कदम कम ही देखने को मिलते हैं।
गुणवत्ता जांच के बिना हो रहा निर्माण
लोक निर्माण विभाग द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों में उपयोग की जा रही मिट्टी की गुणवत्ता जांचने के लिए विभाग के पास संसाधन मौजूद हैं, लेकिन सड़क निर्माण में प्रयुक्त मिट्टी की गुणवत्ता की जांच किए बिना ही काम कराया जा रहा है। ऐसे में इन निर्माण कार्यों के लंबे समय तक टिके रहने की संभावना भी कम हो जाती है। लोक निर्माण विभाग को केवल रॉयल्टी पर्ची से मतलब है, सामग्री की गुणवत्ता से नहीं।

छिटपुट कार्रवाई या सिर्फ खानापूर्ति
गांवों से ट्रैक्टरों के जरिए हो रहे अवैध रेत परिवहन पर कभी-कभार विभाग कार्रवाई करता है। कुछ मामलों में विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 2-4 ट्रैक्टर सीज किए जाते हैं, लेकिन बड़े मामलों में सख्त कार्रवाई हमेशा अपेक्षित ही रह जाती है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि कहीं कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति तो नहीं की जा रही।
माइनिंग की अनुमति अनिवार्य
21वीं सदी में सुविधाओं के साथ-साथ जिम्मेदारियां, नियम और कानून भी बदले हैं। किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह जहां चाहे वहां खुदाई कर दे। कानून सब पर समान रूप से लागू होता है। मिट्टी या मुरुम की खुदाई से पहले माइनिंग विभाग से अनुमति लेना आवश्यक है। विभाग मौके पर जाकर मिट्टी की जांच करता है और सब कुछ सही पाए जाने पर ही खुदाई की अनुमति देता है। इन प्रक्रियाओं से बचने के लिए ठेकेदार निर्माण स्थल के आसपास से ही मिट्टी निकाल लेते हैं, जिससे उनका परिवहन खर्च बच जाता है, यही उनकी असली कमाई है।
एसडीएम बोले-कार्रवाई की जाएगी
बड़े पैमाने पर चल रहे निर्माण कार्यों में उपयोग की जा रही मिट्टी और मुरुम की यदि गंभीरता से जांच की जाए, तो निश्चित तौर पर ठेकेदारों के साथ-साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गाज गिर सकती है। अब देखना यह होगा कि ऐसे मामलों में प्रशासन क्या कदम उठाता है। मुंगेली के एसडीएम अजीत पुजारी ने कहा कि इलाके में अवैध उत्खनन की शिकायतें मिल रही हैं। इस बारे माइनिंग विभाग से बात करता हूं। सही शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



































