BIJAPUR NEWS. बीजापुर जिला मुख्यालय में वन भूमि अतिक्रमण को लेकर जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। नया बस स्टैंड के पीछे स्थित वन भूमि पर बने 100 से अधिक मकानों को प्रशासन ने जेसीबी मशीनों की मदद से तोड़ दिया। इस कार्रवाई से सैकड़ों लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें नक्सल पीड़ित परिवारों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस डीआरजी के कुछ कर्मियों के मकान भी शामिल बताए जा रहे हैं।

अचानक हुई इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया और प्रभावित परिवारों में भारी आक्रोश देखने को मिला। प्रशासन का कहना है कि यह भूमि वन विभाग के अधीन है और लंबे समय से इस पर अवैध रूप से अतिक्रमण किया गया था। कई बार नोटिस जारी किए जाने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर मजबूरी में सख्त कार्रवाई करनी पड़ी।
वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवारों का आरोप है कि नगर पालिका और वन विभाग द्वारा उन्हें कोई पूर्व सूचना या लिखित नोटिस नहीं दिया गया। उनका कहना है कि वे पिछले तीन से चार वर्षों से यहां रह रहे थे, बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उन्हें मिल रही थीं, ऐसे में अचानक घर तोड़ना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। प्रभावित लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि यदि यह भूमि वन विभाग की थी, तो इतने वर्षों तक प्रशासन और संबंधित विभाग मौन क्यों रहे।

लोगों का आरोप है कि पहले मौन स्वीकृति दी गई और अब बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें बेघर कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा, कई परिवार खुले आसमान के नीचे आने को मजबूर हो गए। इस घटना से नाराज प्रभावित नागरिकों ने स्थानीय विधायक विक्रम मांडवी के नेतृत्व में सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। सड़क जाम के कारण कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
सूचना मिलते ही विधायक विक्रम शाह मंडावी मौके पर पहुंचे और पीड़ितों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। विधायक ने प्रशासनिक अधिकारियों से फोन पर संपर्क कर तत्काल मौके पर पहुंचने और बातचीत करने की मांग की। हालांकि, अधिकारियों के तत्काल नहीं पहुंचने पर प्रदर्शन और उग्र हो गया। नाराज लोग प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे और न्याय की मांग करते रहे। स्थिति बिगड़ते देख अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

कुछ समय बाद नगर पालिका अधिकारी, राजस्व विभाग के अधिकारी और पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचे और विधायक की मौजूदगी में प्रभावित परिवारों से चर्चा शुरू की। विधायक विक्रम मांडवी ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए कहा कि नक्सल पीड़ित परिवारों और सुरक्षाबलों से जुड़े कर्मियों के साथ इस तरह की कार्रवाई दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, अस्थायी आवास और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर ठोस निर्णय लिया जाए।
फिलहाल प्रशासन और प्रभावित नागरिकों के बीच बातचीत जारी है। प्रशासन का कहना है कि नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी, वहीं पीड़ित परिवार न्याय और पुनर्वास की मांग पर अड़े हुए हैं। मामले पर पूरे जिले की नजर बनी हुई है।




































