BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित सिम्स मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल एक बार फिर गंभीर विवाद में घिर गया है। इस बार मामला सीधे अस्पताल परिसर में गुंडागर्दी से जुड़ा है, जहां रेडियोलॉजी विभाग के एक टेक्नीशियन ने इंटर्नशिप कर रही छात्रा की खुलेआम पिटाई कर दी। हैरानी की बात यह है कि घटना के 24 घंटे बाद भी सिम्स प्रबंधन ने आरोपी टेक्नीशियन के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है, जिससे इंटर्न और मेडिकल छात्रों में भारी आक्रोश है।

मिली जानकारी के अनुसार यह घटना शुक्रवार दोपहर की है। रेडियोलॉजी विभाग के टेक्नीशियन मनीष कुमार सोनी और इंटर्न छात्रा के बीच किसी पुराने विवाद को लेकर पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि आक्रोशित टेक्नीशियन ने छात्रा को एक के बाद एक कई थप्पड़ जड़ दिए। अचानक हुई इस घटना से छात्रा पूरी तरह स्तब्ध रह गई, वहीं मौके पर मौजूद अन्य लोग भी कुछ समझ पाते, उससे पहले ही मारपीट हो चुकी थी।

इस घटना से मानसिक रूप से आहत छात्रा ने तत्काल सिम्स के डीन और मेडिकल सुपरिटेंडेंट को लिखित शिकायत दी। बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर प्रबंधन स्तर पर करीब एक घंटे तक बैठक भी हुई, लेकिन इसके बावजूद आरोपी टेक्नीशियन पर न तो निलंबन हुआ और न ही कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई सामने आई।
इंटर्न और छात्रों में उबाल
कार्रवाई न होने से इंटर्न डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और छात्राओं में गहरा रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि यदि अस्पताल परिसर में ही छात्राएं सुरक्षित नहीं हैं और दोषियों को संरक्षण मिलता रहेगा, तो यह भविष्य के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।

विवादों से पुराना नाता
गौरतलब है कि सिम्स प्रबंधन पहले भी कई गंभीर मामलों को लेकर सवालों के घेरे में रहा है। हाल ही में एक पीजी छात्रा से छेड़छाड़, अश्लील मैसेज और यौन उत्पीड़न के आरोपों में घिरे एचओडी डॉक्टर पंकज टेंभूर्णीकर पर भी संस्थान स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद शासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और तब जाकर आरोपी डॉक्टर का तबादला किया गया।
इसके अलावा, पूर्व में सिम्स से एमबीबीएस कर चुकी एक छात्रा द्वारा परिसर में आत्महत्या की घटना भी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर चुकी है।

प्रशासन पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने सिम्स प्रबंधन की निष्क्रियता और लापरवाही को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि क्या सिम्स में दोषियों पर कभी सख्त कार्रवाई होगी या हर बार की तरह मामला दबा दिया जाएगा?




































