SAGAR NEWS. बीना विधानसभा से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उन्हें दल-बदल कानून के तहत नोटिस जारी किया है। उन्हें 18 नवंबर तक जवाब देने के निर्देश दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अदालत का यह मामला उनकी विधानसभा सदस्यता पर सीधा असर डाल सकता है।

भाजपा से बढ़ाई नजदीकी
विधानसभा चुनाव 2023 में निर्मला सप्रे ने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी। मगर, 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान उन्होंने पार्टी छोड़े बिना भाजपा नेताओं से नजदीकियां बढ़ा लीं। हालांकि, उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा ज्वाइन नहीं की, लेकिन उनका रुख विवादों में आ गया।

उमंग सिंघार की याचिका बनी वजह
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जून 2024 में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दल-बदल कानून के तहत याचिका दाखिल की थी। आरोप था कि विधायक निर्मला सप्रे ने कांग्रेस की नीतियों के विपरीत जाकर भाजपा से गठजोड़ जैसे कदम उठाए हैं।
अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की ओर से इस पर कोई फैसला न आने पर उमंग सिंघार ने मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पहुंचाया। जबलपुर बेंच ने 7 नवंबर को सुनवाई करते हुए विधायक निर्मला सप्रे और विधानसभा अध्यक्ष दोनों को नोटिस जारी कर 18 नवंबर तक जवाब देने को कहा है।

कोर्ट ने मांगी पूरी स्थिति रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने पूछा है कि विधानसभा अध्यक्ष के पास लंबित दल-बदल याचिका की स्थिति क्या है और अब तक निर्णय क्यों नहीं हुआ? दोनों पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपना लिखित जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जयदीप कौरव ने कहा कि यह मामला विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता का भविष्य तय करेगा। यह याचिका मुख्य न्यायाधीश की डिविजन बेंच और न्यायमूर्ति विनय सरावगी के समक्ष सुनी जा रही है।

राजनैतिक हलकों में बढ़ी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सागर और भोपाल के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। जानकारों का मानना है कि अगर कोर्ट में दल-बदल कानून के तहत याचिका साबित होती है, तो निर्मला सप्रे की सदस्यता खतरे में पड़ सकती है।




































