INDORE NEWS. इंदौर के परदेसीपुरा इलाके में चार गुना छह फीट की छोटी गुमटी है। यहां 72 साल के धन्नालाल पावेचा लकड़ी का सामान बेचकर गुजारा करने वाले आम इंसान हैं। मगर, इस उम्र में उन तमाम आम लोगों के लिए उन्होंने मिसाल कायम की है, जो सरकारी तंत्र की गलती झेलकर चुपचाप बैठे रहते हैं।

200 रुपए की जगह आया 699 का बिल
धन्नालाल को सामान्य तौर पर 200-250 रुपए के बिजली बिल आता था। मगर, अक्टूबर 2023 में इसकी जगह 699 रुपए का बिल मिला, तो उन्होंने इसे गलत मानते हुए लड़ाई शुरू की। धन्नालाल ने बिजली कंपनी से बार-बार मांग की कि बिल सही किया जाए, लेकिन उनकी फरियाद अधिकारियों ने कई महीनों तक अनसुनी कर दी।
हक की बात करने पर काटी बिजली
वह कभी झोनल कार्यालय तो कभी पोलोग्राउंड मुख्यालय पहुंचे। मगर, सिर्फ निराशा हाथ लगी। मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। जैसे ही उन्होंने हक की बात की, इंजीनियर ने नाराज होकर अनंत चतुर्दशी के सीजन में तीन-चार दिन उनकी बिजली ही काट दी। इसकी वजह से शाम के समय दुकान में अंधेरा छा गया, जिससे दुकान बंद रही और धन्नालाल को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।

कंज्यूमर फोरम में लगाया केस
परिस्थितियां मुश्किल जरूर थीं। मगर, धन्नालाल ने हार मानने के बजाय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में शिकायत दायर की। अपने केस में उन्होंने बिजली कंपनी और इंजीनियरों को पक्षकार बनाया। फोरम ने कई बार नोटिस भेजे, लेकिन कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

बिजली कंपनी को देना पड़ा हर्जाना
आखिरकार 14 अक्टूबर 2025 को आयोग ने धन्नालाल की मेहनत और सच्चाई को न्याय दिलाया। फोरम ने आदेश दिए कि 699 रुपये की अतिरिक्त राशि बिल में समायोजित की जाए। इसके साथ ही मानसिक, आर्थिक और शारीरिक कष्ट के बदले कंपनी को 5 हजार रुपये हर्जाना धन्नालाल को देने का आदेश दिया।

गलत हो, तो आवाज उठाना जरूरी
धन्नालाल कहते हैं, “आपके साथ अगर गलत हो, तो आवाज उठाना जरूरी है। अगर इंसान हिम्मत रखे, तो बदलाव की शुरुआत खुद से होती है।” उनके साहस ने यह दिखा दिया कि न्याय की लड़ाई छोटी रकम या बड़ी ताकत से नहीं, बल्कि सच्चे हौसले और जिद से जीती जाती है। अब धन्नालाल की लड़ाई आस-पास के लोगों को जागरुक कर रही है।



































