BILASPUR NEWS. हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक लेक्चरर की तबादला आदेश के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए साफ कहा है कि जब कोई कर्मचारी ट्रांसफर पोस्ट पर कार्यभार ग्रहण कर लेता है, तो वह आदेश स्वीकार कर लिया गया माना जाता है। इसके बाद उस पर आपत्ति जताने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

मामला शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अभनपुर की इतिहास विषय की लेक्चरर से जुड़ा है, जिन्हें राजपुर ट्रांसफर किया गया था। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि काउंसलिंग प्रक्रिया में अधिकारियों ने पद रिक्तियों की जानकारी छिपाई और उन्हें अनुचित रूप से ट्रांसफर कर दिया गया। वहीं शासन की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने कहा कि ट्रांसफर आदेश युक्तियुक्तकरण और परामर्श प्रक्रिया के तहत जारी किया गया था और याचिकाकर्ता ने स्वयं नई जगह कार्यभार ग्रहण कर लिया था।

डिवीजन बेंच ने पाया कि याचिकाकर्ता ने ट्रांसफर स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने के बाद ही आदेश को चुनौती दी, जबकि सुप्रीम कोर्ट के यू.पी. सिंह बनाम पंजाब नेशनल बैंक मामले में पहले ही स्पष्ट किया गया है कि कार्यभार ग्रहण करने के बाद ट्रांसफर आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने कहा कि जब कोई कर्मचारी आदेश का अनुपालन कर लेता है, तो वह आदेश स्वीकार्य माना जाता है। यदि कोई आपत्ति है, तो उसे आदेश लागू होने से पहले दर्ज किया जाना चाहिए।
इसी प्रकार तरुण कानूनगो बनाम छत्तीसगढ़ राज्य मामले में दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार ट्रांसफर आदेश पूरी तरह से निष्पादित हो जाने के बाद उसका प्रभाव समाप्त हो जाता है।

डिवीजन बेंच ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता ट्रांसफर आदेश लागू होने के बाद भी अपने पुराने विद्यालय में बने रहने का अधिकार नहीं रखती। इस आधार पर सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए डिवीजन बेंच ने याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया।




































