जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दमोह जिले के सतारिया गांव में ओबीसी युवक को पैर धोकर पानी पीने के लिए मजबूर करने की घटना पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने दमोह एसपी को आदेश दिया है कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351 और 133 के तहत मामला दर्ज कर एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) के तहत कार्रवाई की जाए। अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

कोर्ट ने कहा कि वायरल वीडियो में पहचान में आने वाले सभी लोगों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने दमोह घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त टिप्पणी की है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने कहा कि देश में जातिगत तनाव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। कोर्ट ने जोर दिया कि अब हर जाति अपनी पहचान को लेकर अत्यधिक संवेदनशील हो गई है, जिसके चलते समाज में जातीय हिंसा के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

खतरे में पड़ जाएगा अस्तित्व
बेंच ने देश के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने और हरियाणा में एक वरिष्ठ पुलिस अफसर की आत्महत्या जैसी घटनाओं का भी हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि लोग खुद को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र कहकर आपस में लड़ रहे हैं, जिसका नतीजा समाज की एकता पर खतरा बनता जा रहा है। अदालत ने चेताया कि यदि जातिगत विद्वेष इसी तरह बढ़ता रहा तो हिंदू समाज का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

गांव में जातीय तनाव की शुरुआत ऐसे हुई
यह मामला दमोह के सतरिया गांव का है। यहां ओबीसी समुदाय के पुरुषोत्तम कुशवाहा ने ब्राह्मण समाज के अनुज उर्फ अन्नू पांडे का एआई से बना मीम पोस्ट किया था, जिसमें उन्हें जूतों की माला पहने दिखाया गया। पांडे पर आरोप था कि उसने पंचायत द्वारा लागू शराबबंदी का उल्लंघन करते हुए शराब बेची। इसके बाद गांव में तनाव फैल गया और पंचायत ने पुरुषोत्तम को प्रायश्चित करने का आदेश दिया।

मंदिर में बुलाकर कराई गई अपमानजनक हरकत
पंचायत के फैसले के बाद पुरुषोत्तम को मंदिर में भीड़ के सामने बुलाया गया। वहां उसे अन्नू पांडे के पैर धोने और वही पानी पीने के लिए मजबूर किया गया। इस पूरी घटना का वीडियो वायरल हो गया, जिससे पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया।

प्रशासन की सख्ती और गिरफ्तारी
मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य फरार हैं। कलेक्टर और एसपी ने कहा कि गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल की तैनाती की गई है। अधिकारियों ने साफ किया है कि इस तरह की अमानवीय घटनाओं को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ।




































