COLOMBO NEWS. थाईलैंड के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका दौरे पर कोलंबो पहुंचे। इस दौरान पीएम मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने भारत-श्रीलंका के रिश्तों को और मजबूत करने के बारे में चर्चा की। राष्ट्रपति दिसानायके ने भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति श्रीलंका की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कहा कि श्रीलंका अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत की सुरक्षा के खिलाफ या क्षेत्रीय स्थिरता के विपरीत किसी भी उद्देश्य के लिए नहीं होने देगा। यह बयान प्रधानमंत्री मोदी के साथ औपचारिक बातचीत के बाद कोलंबो में दिया गया। यह भारत और श्रीलंका के बीच गहरे विश्वास और सहयोग को दर्शाता है।
राष्ट्रपति दिसानायके ने प्रधानमंत्री मोदी से एक महत्वपूर्ण समुद्री मुद्दे पर सहयोग मांगा। उन्होंने पीएम मोदी से श्रीलंका के संयुक्त राष्ट्र महासागर आयोग में दावे को लेकर तकनीकी चर्चा शीघ्र आयोजित करने का अनुरोध किया। यह मुद्दा श्रीलंका की एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) से परे समुद्री सीमाओं से संबंधित है।
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राष्ट्रपति दिसानायके ने डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सहयोग की संभावना पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि श्रीलंका को विकास, नवाचार और दक्षता बढ़ाने के लिए डिजिटल अर्थव्यवस्था का महत्व समझ में आया है। उन्होंने भारत सरकार को श्रीलंका के डिजिटल पहचान परियोजना के लिए 300 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने के लिए धन्यवाद भी दिया।
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राष्ट्रपति दिसानायके ने भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों की अहमियत को बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का रिश्ता सदियों पुराना है और यह साझा मूल्यों, आपसी सम्मान और सामान्य हितों पर आधारित है।
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प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति दिसानायके के बीच बातचीत के दौरान भारत, श्रीलंका और यूएई के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने का उद्देश्य रखता है। बता दें कि श्रीलंका से पहले पीएम मोदी थाईलैंड दौरे पर थे।