AMBIKAPUR. जिले के वाड्रफनगर क्षेत्र के जंगल में तीन लोगों ने जंगली सूअर और चीतल पकड़ने के लिए करंट बिछा दिया था। इसमें चीतल या सूअर तो नहीं पकड़ाए बल्कि करंट की चपेट में आकर दो भालू मर गए। वन विभाग की टीम ने तीन लोगों को भी मौके पर ही पकड़ लिया।
वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र में मेंढना बीट के अंतर्गत ग्राम गुरमुटी से लगा हुआ जंगल है। वन विभाग की टीम को जानकारी मिली थी कि पिछले कुछ दिनों से जंगली जानवरों का शिकार करने के लिए लोग यहां जीआई तार का घेरा लगा रहे हैं, जिसमें वे करंट प्रवाहित कर देते हैं। लिहाजा टीम सक्रिय हो गई और जानकारी जुटाई जाने लगी। इसी सिलसिले में एक टीम जंगल में जायजा ले रही थी। तभी उन्हें गुरमुटी के कारीमाटी में दो भालुओं का शव पड़ा हुआ मिला। उनमें से एक एक नर तो दूसरी मादा भालू थी। जबकि पास में ही तीन लोग भी मिल गए। टीम ने उन्हें पकड़ लिया।

घटनास्थल पर बिजली तार का फंदा, पाइप, लकड़ी के खूंटे भी मिले। अब तक करंट की चपेट से जंगली जानवरों के मरने के कई मामले सामने आ चुके हैं। अधिकांश मामलों में किसान अपनी फसल को बचाने के लिए ऐसा करते हैं। लेकिन यहां पर तो दूर- दूर तक कोई खेती नजर नहीं आ रही थी। स्पष्ट था कि शिकार करने के लिए ही इन लोगों ने ऐसा जाल बिछाया था। मौके पर बकायदा लकड़ी का खूंटा गड़ाया गया था और उन्हें जीआई तार और लोहे के पतले तार से जोड़ दिए थे।
जंगल से होकर गुजरी हाईटेंशन बिजली तार से हूकिंग करके तार को लोहे के तार से जोड़ा गया था, जिससे करंट प्रवाहित हो रहा था। इसी से भालुओं की मौत हुई थी। बाद में दोनों शवों को वाड्रफनगर के खरहरा स्थायी रोपणी में लाया गया, जहां उनका पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद दोनों को जला दिया गया।
सूअर और चीतल के शौकीनों से जंगली जानवरों की शामत
भालुओं के शिकार की जानकारी वनमण्डलाधिकारी बलरामपुर विवेकानंद झा को हुई तो वे भी अन्य अधिकारियों के साथ वाड्रफनगर पहुंचे। उनका कहना था कि यहां फसल बचाने के लिए तो लोग करंट बिछाते ही हैं। इसके साथ ही जंगली सूअर और चीतल खाने के शौकीन भी उनका शिकार करने के लिए करंट बिछाकर उन्हें पकड़ने की फिराक में रहते हैं। इससे कभी सूअर पकड़ाते हैं तो कभी चीतल, नहीं तो भालू और दूसरे जंगली जानवर भी चपेट में आ जाते हैं।
इस तरह की घटनाओं में हाथी तक की मौत का मामला सामने आ चुका है। बीते दिनों फसल बचाने के लिए बिछाए करंट में एक किसान की भी मौत हो गई थी। इसके बाद भी लोग इस तरह की हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।







































