BHILAI. भारत में एक समय ऐसा था जब हर अभिभावक का तो सपना ही यही होता था कि उनका बच्चा इंजीनियर बने। लेकिन पिछले कुछ समय में ये क्षेत्र अपना महत्व खोता जा रहा था। छात्र इंजीनियरिंग छोड़ अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे थे। लेकिन छात्रों की रुचि इंजीनियरिंग की तरफ एक बार फिर बढ़ी है। वहीं अगर बात छत्तीसग़ढ की करे तो यहां इंजीनियरिंग का दौर अब वापस लौट चुका है। ऐसा हम इसलिए कह रहे है क्योंकि प्रदेश के निजी कॉलेजों में संतोष रूंगटा इंजीनियरिंग कॉलेज (रूंगटा आर-1) ने नया इतिहास रच दिया है।
बता दें प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। इस बार पहले चरण की काउंसलिंग में कुल 3806 सीटें अलॉट की गईं। जहां एक ओर सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की सभी सीटें पूरी तरह से भर चुकी हैं। वहीं अगर प्रदेश के निजी कॉलेजों की बात करे तो संतोष रूंगटा इंजीनियरिंग कॉलेज (रूंगटा आर-1) ने नया कीर्तिमान बना दिया है। पहले चरण की काउंसलिंग में रूंगटा आर-1 इंजीनियरिंग कॉलेज की 550 सीटें अलॉट की गई थीं, जिसमें शनिवार तक 533 सीटों पर एडमिशन हो चुके है। रूंगटा ग्रुप की 96.9 फीसदी सीटों पर एडमिशन पहले ही चरण में पूरे हो गए है।
बता दें तकनीकी शिक्षा निदेशालय रिक्त रह गई सीटों की जानकारी 26 सितंबर को अपलोड करेगा। इसी दिन से काउंसलिंग के दूसरे चरण की शुरुआत भी हो जाएगी। विद्यार्थी 28 सितंबर तक दूसरे चरण की काउंसलिंग का पंजीयन करा सकेंगे। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन 28 सितंबर तक कराना होगा। दूसरे चरण की सीटों का आवंटन एक अक्टूबर को होगा। इसके बाद एडमिशन 3 से 6 अक्टूबर तक लेना होगा। प्रदेश में तकनीकी शिक्षा के मामले में भिलाई का रूंगटा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिग एंड टेक्नोलॉजी छात्रों की पहली पसंद बनकर उभरा है।

इंजीनियरिंग की काउंसलिंग में सबसे ज्यादा छात्रों ने रूंगटा कॉलेज को अपनी पहली पसंद बनाया है। इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए प्रवेश पीईटी व जेईई की परीक्षा में पास छात्रों को मेरिट के आधार पर कॉलेजों और ब्रांचों का विकल्प चुना है।









































