BALRAMPUR. जिले के वाड्रफनगर की इस तस्वीर की मार्मिकता को महसूस कीजिए, शायद इसके लिए आपको शब्दों की जरूरत नहीं होगी। लेकिन, इनके हालात के बारे में बताएं तो वह इससे भी ज्यादा हृदयविदारक है। घर का अकेला कमाऊ व्यक्ति बीमार पड़ गया। अस्पताल ले जाने वाला कोई नहीं। तब मासूम भांजा घर में ही रखे सामान ढोने वाले रिक्शे से अपने मामा को लादकर अस्पताल के लिए निकल पड़ा। लेकिन, अस्पताल में डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इससे घर में अब दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

नगर पंचायत वाड्रफनगर के वार्ड क्रमांक दो निवासी 40 वर्षीय अशोक पासवान रोजी-मजदूरी कर परिवार चलाता था। पिछले कुछ दिनों से वह बीमार था। वहीं घर में उसके साथ मां, बहन और भांजा रहते हैं। इस बीच बहन और मां ही उसका इलाज करा रहे थे। बीते शनिवार की शाम अशोक की तबीयत ज्यादा ही खराब हो गई। हालात ऐसे थे कि उसे जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना था। घर में अशोक का मालवाहक रिक्शा खड़ा था और ले जाने के लिए मासूम भांजा। फिर क्या था, मां और बहन ने जैसे-तैसे अशोक को रिक्शे में लाद दिया।

इसके बाद नन्हा भांजा रिक्शे को खींचते हुए अस्पताल के लिए निकल पड़ा। सड़क पर जाते हुए वह पसीने से तर-बतर था, हाथ-पैर जवाब दे रहे थे पर इसकी परवाह किए बगैर वह जल्दी अस्पताल पहुंचना चाहता था, जिससे मामा को बचाया जा सके। इस बीच वह पुलिस चौकी के सामने से गुजर रहा था। तब पुलिसवालों की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने पास जाकर मासूम से सब हाल जाना। उनका दिल भी पसीज गया और तत्काल पुलिस चौकी की गाड़ी में अशोक को लिटाकर और उसके भांजे को बैठाकर नगर के सिविल अस्पताल पहुंचाया। यहां पर डाक्टरों ने उसकी जांच की। तब तक काफी देर हो चुकी थी और अशोक की मौत हो चुकी थी।

खून की कमी बनी मौत का कारण
शनिवार को शाम हो जाने की वजह से शव का परीक्षण नहीं किया जा सका था। ऐसे में रविवार को उसका पीएम किया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट में विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशांक गुप्ता ने बताया है कि शरीर में खून की कमी पाई गई है। हो सकता है कि तीन-चार दिनों तक बीमार रहने से वह कुछ खाया-पिया नहीं होगा, जिससे उसकी ये हालत हुई होगी। लिहाजा उसका पेट भी खाली था।
सजगता दिखाते तो नहीं छिनता घर का इकलौता कमाऊ
अशोक की मौत और उसके घर के हालात को लेकर नगरवासियों का कहना है कि संजीवनी 108, पुलिस की डायल 112 गाड़ी समेत कई सुविधाएं हैं लेकिन जागरूकता के अभाव में इनके बजाय रिक्शे का सहारा लिया गया, जिससे देरी हुई। वहीं समय रहते एक-दो दिन पहले अस्पताल ले जाते तब भी अशोक की जान बच सकती थी। अब घर का इकलौता कमाऊ चला गया। घर में रह गए सिर्फ असहाय मां, बहन और नन्हा भांजा।


































