RAIPUR. कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर में कार्य परिषद सदस्य की तल्ख़ चिठ्ठियों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आ गया है। आज विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार द्वारा एक साथ 3 पत्र जारी कर कार्य परिषद सदस्य द्वारा बताई गईं खामियां दूर करने के आदेश जारी किये गए। कुछ मामलों में जिम्मेदारियां भी तय की गयीं हैं।
गौरतलब है कि कुछ दिनों पूर्व विश्वविद्यालय के नव मनोनीत कार्यपरिषद सदस्य राजकुमार सोनी ने विश्विद्यालय भ्रमण के बाद खामियों को इंगित करते खत कुलपति के नाम लिखे गए थे। कुलपति को निशाना बनाते हुए लिखे गए इन पत्रों ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। इसमें विश्वविद्यालय में फैली गंदगी से लेकर टूटे फर्नीचर और विश्वविद्यालय में हुए भ्रष्टाचार का जिक्र फिल्मीं अंदाज में किया गया था। इसी खत के बाद आज विश्वविद्यालय प्रबंधन ने समस्याओं के निदान के लिए 3 आदेश जारी किये हैं।

साफ़ सफाई पर अतिरिक्त ध्यान देने का आदेश
विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा जारी आदेश में सभी विभाग प्रमुखों को साफ़-सफाई पर अतिरिक्त ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी विभागों में प्रतिदिन साफ़-सफाई हो और ध्यान रखा जाए कि परिसर में किसी भी प्रकार की गंदगी न हो। साथ ही साफ़-सफाई के लिए पदस्थ सभी कर्मचारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि अपने काम को सही ढंग से और ईमानदारी के साथ प्रतिदिन पूरा करें।
जर्जर और अनुपयोगी सामग्रियों के पंचनामा के लिए समिति का गठन
विश्वविद्यालय के दोनों संकाय भवन 1 और 2 के साथ ग्रंथालय, अतिथि गृह, प्रशासनिक भवन और बालक/बालिका छात्रावास की टूटी या अनुपयोगी सामग्रियों का पंचनामा करने के लिए समिति का गठन किया गया है। इस समिति को कि 28 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

प्रतिनियुक्ति पर गए अधिकारियों की वापसी को भेजा पत्र
विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. अभिषेक दुबे की प्रतिनियुक्ति 02 अगस्त 2017 से छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी निमोरा, रायपुर में 03 वर्ष के लिए की गई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय से बिना अनुमति लिए ही उनकी प्रतिनियुक्ति आगे बढ़ा दी गई। इससे विश्वविद्यालय का अध्यापन कार्य प्रभावित होने लगा है। कार्यपरिषद सदस्य द्वारा ध्यान दिलाये जाने पर विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी निमोरा के संचालक को डॉ. अभिषेक दुबे की प्रतिनियुक्ति ख़ारिज कर उन्हें वापस विश्वविद्यालय भेजने की मांग की गई है।





































