तीरंदाज, दुर्ग। भारती विश्वविद्यालय छात्रों ने क्राइम सीन इन्वेस्टीगेशन व फोरेंसिक साइंस के बारे में जाना। यहां बीएससी (फारेंसिक साइंस) कोर्स इसी सत्र से शुरू हुआ और इस कोर्स में प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स के लिए एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। फारेंसिक साइंस विभाग और अगद तंत्र विभाग, भारती आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन का विषय ‘क्राइम सीन इन्वेस्टीगेशन’ था। उद्घाटन सत्र में लॉ विभाग के डीन प्रो केसी दलाई ने अतिथियों का स्वागत और विषय प्रवर्तन किया।

सम्मेलन में कांकेर पुलिस में क्राइम सीन एक्सपर्ट बिराज मण्डल विशेष रूप से मौजूद रहे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में फोरेंसिक साइंस के महत्व को समझना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि फारेंसिक विषेषज्ञ को अपने कर्तव्य के प्रति बहुत ईमानदार होना चाहिए और साक्ष्य की लैब रिपोर्ट के आधार पर ही कोई राय देना चाहिए। मण्डल ने फारेंसिक साइंस में फिजिक्स, कैमेस्ट्री, बायोलॉजी आदि विषयों की उपयोगिता को समझाया।

राष्ट्रीय सम्मेलन-सह-कार्यशाला के दूसरे सत्र में वक्ता के रूप में इंस्टीट्यूट ऑफ फारेंसिक साइंस, मुंबई के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं फारेंसिक मेडिसिन एक्सपर्ट अशर दगानी ने क्राइम सीन जांच की प्रक्रिया और इसके विधिक पहलू को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि साक्ष्यों को सही तरीके से जमा करके फोरेंसिक लैब तक ले जाना सबसे चुनौतिपूर्ण कार्य है। राष्ट्रीय सम्मेलन-सह-कार्यशाला के तीसरे सत्र में डमी क्राइम सीन तैयार करके विद्यार्थियों को समझाया गया। इसमें इनडोर और आउटडोर क्राइम सीन तैयार किये गये थे।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सुशील चन्द्राकर ने राष्ट्रीय सम्मेलन-सह-कार्यशाला के सफलतापूर्वक सम्पन्न होने पर सभी को बधाई देते हुए कहा कि बहुत ही प्रासंगिक विषय पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कुलपति डॉ एचके पाठक ने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। कुलसचिव डॉ वीरेन्द्र स्वर्णकार ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हए फारेंसिक साइंस में कॅरियर का सुनहरा अवसर है।

कार्यक्रम के आयोजन में डॉ प्रशांत, दीप्ती पटेल और निशा ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम का संचालन पारूल केसरिया और सोनिका बाधवानी ने किया। इस अवसर पर डीन अकादमिक प्रो. आलोक भट्ट, प्रो. घोष, डॉ. मुकेश राय, डॉ. रूचि सक्सेना, डॉ. नम्रता गेन, डॉ. हितेन्द्र लाउत्रे, डॉ. रोहित कुमार वर्मा, डॉ. स्नेह कुमार मेश्राम, डॉ. निधि वर्मा, मिथिलेश साहू सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापकगण, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।




































