RAIPUR. 25 साल पहले अभनपुर से लापता हुई महिला घर वापस आ गई है। महिला का नाम साबिया ठाकुर है, जो 25 साल पहले अभनपुर के कुर्रु गांव से कहीं गुम हो गई थी। बताया जा रहा है कि महिला की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। जिस वजह से वो किसी को कुछ बता नही पाई और वह महाराष्ट्र पहुंच गई। जहां साल भर पहले ही श्रद्धा फाउंडेशन नाम के एनजीओ को यह महिला मिली। एनजीओ ने महिला को अपने रिहैबिलिटेशन भिजवाकर उसका इलाज कराया।
बता दें 25 साल पहले अभनपुर के कुर्रु गांव लापता हुई साबिया के घर वालों ने उसको ढूंढ़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। अब आ गई है। और उसके घर लौट आने में श्रद्धा फाउंडेशन और अभनपुर थाने में पदस्थ बसंत साहू का बहुत बड़ा हाथ है। श्रद्धा फाउंडेशन मुंबई की कर्मचारी पोली दास ने बताया कि आज से लगभग 1 साल पहले साबिया उन को रोड पर बहुत ही बुरी हालत में मिली थी। उसकी मानसिक हालत भी ठीक नहीं थी। जिसके बाद उसको श्रद्धा फाउंडेशन के रिहैबिलिटेशन में भेजा गए। जहां डॉक्टर भारत मतवानी ने उस का इलाज किया। जब उस की हालत में सुधार हुआ तो उस ने अपने घर वालों के बारे में आधी अधूरी जानकारी दी। लेकिन अच्छी बात यह रही की उसने यह बात दिया की वो रायपुर के पास किसी गावं की रहने वाली है।

एनजीओ ने इसके बाद रायपुर पुलिस से संपर्क किया और साबिया का एक वीडियो भी उन को भेजा। जिसे रायपुर पुलिस ने महिला द्वारा बातए हुए गावं से सम्बंधित थाने में भेजा। इस वीडियो के आधार पर अभनपुर थाने में पदस्थ बसंत साहू ने महिला के घर वालों को ढूंढ निकाला। बसंत साहू ने बताया कि वीडियो में महिला द्वारा दी गई जानकारी से कुछ पता नहीं चल पा रहा था। लेकिन जब बाद में NGO से पोली दास का फोन आया और फिर महिला ने बताया की वो कुर्रु गावं में रहती थी तब उन्होंने गावं के सरपंच से संपर्क किया। जिसके बाद उनको महिला के परिवार का पता चला।
बसंत साहू ने बताया कि महिला के घर वालो को ढूढ़ने में काफी मुश्किल हुई लेकिन अब जब महिला अपने परिवार के पास पहुंच चुकी है तो बहुत अच्छा लग रहा है। बता दें मुंबई से साबिया कल रायपुर पहुंची थी, उस के साथ NGO कर्मी पोली दास भी थी। साबिया को उसके परिवार के सुपुर्द करने के बाद वो मुंबई लौट गई।





































